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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मध्य एशिया से अमेरिका की वापसी के क्‍या हैं मायने

अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से वापसी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक दौर है। लंबे समय से चली आ रही एक ध्रुवीय व्यवस्था में ‘विश्व शांति’ और ‘मानवाधिकार’ की सुरक्षा के लिए अमेरिका द्वारा एकतरफा सैन्य कार्रवाई ने विश्व व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) में कमोबेश स्थायित्व बना रखा था। तालिबान की सत्ता में वापसी ने वर्ल्ड ऑर्डर के इस स्थायित्व को चुनौती दी है।

अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी पर चर्चा अभी जारी है। दरअसल पश्चिम एशिया में ईरान जैसे स्थानीय सहयोगियों के साथ चीन और रूस द्वारा पेश की गई चुनौतियों को देखते हुए अमेरिकी नीति निर्माताओं ने मध्य एशिया से पीछे हटना ही मुनासिब समझा।

वैश्विक परिस्थितियों के लिहाज से देखा जाए तो मध्य एशिया वह ऐतिहासिक क्षेत्र रहा है जो आमतौर पर यह निर्धारित करता है कि दुनिया को कौन नियंत्रित करेगा। एक ऐसा क्षेत्र जिसके लिए अमेरिका ने पूर्व सोवियत संघ के साथ प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लड़ाई लड़ी थी। देखा जाए तो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘महाशक्ति’ को मुख्यत: दो बिंदुओं के आधार पर पारिभाषित किया जाता है। पहला, महाशक्ति वह है जिसका ‘वैश्विक’ प्रभाव होता है और उसका आधिपत्य दुनिया के हर कोने में हो। दुनिया के अन्य देश इस महाशक्ति को मान्यता भी देते हों। दूसरा, जो दुनिया के हर क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने की क्षमता रखता हो। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने अपने इस आधिपत्य को दुनिया के हर क्षेत्र में बनाए रखा। ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं था, जहां अमेरिकी सेना की उपस्थिति नहीं थी।

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