पीएम ने सौंपा देश को जैविक प्रबंधन संस्थान 80 करोड़ में बने… इंतजार फैकल्टी का

नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फेसिंग के माध्यम से रायपुर के बरोंडा में नवनिर्मित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत राष्ट्रीय जैविक प्रतिबल (स्ट्रेस) प्रबंधन संस्थान के भवन को राष्ट्र के हवाले कर दिया है। करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह भवन बनकर तो तैयार हो गया है पर अभी यहां फैकल्टी की नियुक्ति का इंतजार है। आलम यह है कि इस संस्थान के लिए केंद्र की ओर 200 पदों का सेटअप दिया गया है
इनमें अकेले 60 वैज्ञानिकों को पद हैं। साल 2012 में इस संस्थान को स्थापित किया गया था लेकिन अभी तक यहां केवल 18 वैज्ञानिक ही नियुक्त हो पाए हैं। यह तब स्थिति है जब यहां स्नातकोत्तर के नौ सीटों के लिए पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है
वर्तमान में यह संस्थान जैविक स्ट्रेस में बुनियादी व रणनीतिक अनुसंधान, मानव संसाधन और राष्ट्रीय नेटवर्क के लिए नीति समर्थन के लिये कार्य कर रही है । जैविक स्ट्रेस प्रबंधन में अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार के लिये चार स्कूल हैं। इनमें पहला फसल स्वास्थ्य जीव विज्ञान अनुसंधान, दूसरा फसल प्रतिरोध प्रणाली अनुसंधान , तीसरा फसल स्वास्थ्य प्रबंधन अनुसंधान और चौथा फसल स्वास्थ्य नीति समर्थन अनुसंधान शामिल है। स्नातक पाठ्यक्रम के लिए फैकल्टी नियुक्त करनी होगी। इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।
इस संस्थान द्वारा आइसीएआर-आइएआरआई के साथ संबद्धता में शैक्षणिक सत्र 2020-21 में पीजी पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। जैविक स्ट्रैस प्रबंधन को नई दिशा और आयाम देने के लिये आवश्यक सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। इसमें प्रशासनिक, पुस्तकालय और सभागार भवनों के साथ दो स्कूल व एक छात्रावास सम्मिलित हैं। इसके लिए भारत सरकार एवं परिषद द्वारा वर्ष 2017-20 में 58 करोड़ रुपये व अन्य सहयोगी भवनों एवं सुविधाओं के लिए 20 करोड़ रुपए दिए गए हैं।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिये भारत सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय वीरप्पा मोइली समिति ने राष्ट्रीय परिपेक्ष में जैविक प्रतिबल (स्ट्रेस) प्रबंधन संस्थान को खोलने की अनुशंसा की थी। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में कैबिनेट द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान को एक मानित विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने का अनुमोदन किया गया
इसे छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर में स्थापित करना तय किया गया और सात अक्टूबर 2012 को इसका शिलान्यास किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के बरौंडा स्थित अनुसंधान फार्म की 50 हेक्टेयर भूमि संस्थान की स्थापना के लिये आवंटित की गई। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र विशिष्ट पौध संरक्षण का संस्थान हैं।



