बंगाल के 11 जिलों में हुआ ये ‘धोखा’ BJP पर भारी पड़ा, ममता को फायदा दे गया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) के रिजल्ट आ चुके हैं. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीद से कहीं बढ़कर प्रदर्शन किया है. पार्टी 213 सीटें जीती हैं. राज्य में यह तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत है. यही नहीं, अबकी बार पार्टी ने अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है. दूसरी तरफ 200 पार का नारा लगाने वाली बीजेपी केवल 77 सीट ही जीत पाई. वहीं वामपंथी दलों, कांग्रेस और अब्बास सिद्दीकी का संयुक्त मोर्चा एक भी सीट नहीं जीत पाया.
बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं. इन सीटों में से 190 तो केवल 11 जिलों में हैं. अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के विश्लेषण के मुताबिक इन 11 जिलों की बदौलत ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को प्रचंड जीत हासिल हुई है. पार्टी ने यहां की 192 सीटों में से 165 सीटें अपनी झोली में डाली हैं. मतलब लगभग 87 फीसदी का स्ट्राइक रेट. ये सभी जिले दक्षिण बंगाल के हैं. ये 11 जिले उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हूगली, हावड़ा, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व बर्धमान, झारग्राम, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और कोलकाता हैं.
ये 11 जिले TMC के लिए कितने फायदेमंद साबित हुए, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी की जीती हुई कुल सीटों का लगभग 77 फीसदी हिस्सा इन जिलों से ही आया है. इन जिलों में पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है. लोकसभा चुनावों के हिसाब से 2019 में पार्टी को यहां की 142 सीटों पर जीत मिली थी.
विश्लेषण के मुताबिक कोलकाता, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना की कुल 75 सीटों में TMC ने 67 सीटें जीतीं. वहीं हूगली और हावड़ा की 34 सीटों में से 30 पार्टी ने अपनी झोली में डालीं. इसी तरह झारगाम, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण मेदिनीपुर की 34 में से 28, पूर्व बर्धमान की 16 में से 13 और बीरभूम की 11 में से 10 सीटें तृणमूल को मिलीं.
मुर्शिदाबाद की दो सीटों जंगीपुर और शमसेरगंज में उम्मीदवारों की मौत हो जाने के कारण यहां चुनाव आगे बढ़ा दिया गया है. इसलिए जिले की 22 में से 20 सीटों के ही चुनाव परिणाम आए हैं. इनमें से तृणमूल कांग्रेस ने 17 सीटें जीत लीं.
कहां हुआ BJP को नुकसान?
इन जिलों में BJP को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी. इसका आधार यह था कि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में इन जिलों में अप्रत्याशित प्रदर्शन किया था. लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी वो प्रदर्शन दोहरा नहीं पाई.
द टेलीग्राफ ने अपने विश्लेषण में इन जिलों के बीजेपी नेताओं के हवाले से बताया है कि पार्टी के खराब प्रदर्शन के पीछे कई कारण रहे. सबसे पहला तो यह कि राज्य की ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी ने जो कुछ भी बोला, वो बीजेपी के ही खिलाफ चला गया. दूसरा, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व पर बाहरी होने का जो ठप्पा लगा, उसे जनता ने मान लिया. साथ ही धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण भी नहीं हुआ. बंगाल के हिंदुओं ने बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं दिया. तीसरा, TMC से आए जिन नेताओं को थोक के भाव में बीजेपी में एंट्री दी गई, उसका प्रभाव उल्टा ही पड़ा. जनता ने उन नेताओं को सजा दी.



