विवादित बयान देने वाले विधायकों… ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री हमारे लिए कोई मुद्दा नहीं,

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायकों के मंत्रियों के खिलाफ दिए बयानों और बार-बार दिल्ली दौड़ के बीच संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई होने नहीं जा रही है। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा कि अब हर बयान का संज्ञान लिया जाए, नोटिस जारी हो
जो अनुशासनहीनता के दायरे में होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। बाकी चर्चा और बयान आते रहते हैं। विधायकों के बयानों और मंत्री पर लगाए आरोपों को लेकर पुनिया ने कहा कि इनके बयानों का जनता पर कोई प्रभाव नहीं है। करीब साढ़े तीन घंटे चली प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पुनिया ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक की जानकारी दी।
सीडब्ल्यूसी में छत्तीसगढ़ के परफार्मेंस के संबंध में चर्चा पर उन्होंने कहा कि इसको लेकर कोई एजेंडा नहीं है, लेकिन बातचीत के दौरान विषय शामिल किया जा सकता है। पुनिया ने कहा कि बैठक में मुख्य रूप से सत्ता, संगठन और विधायकों के बीच सामंजस्य बिठाने को लेकर चर्चा हुई। इस के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विवाद पर उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं पर चर्चा हुई है,
वह केवल बूथ समितियां बनाने का काम कर रही हैं। इस दौरान विधायकों और संगठन में सामंजस्य स्थापित करने के बारे में भी बात हुई है। पिछले दिनों हम पिछले चुनाव से बेहतर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। पुनिया ने कहा कि ढाई-ढाई का मुख्यमंत्री हमारे लिए कोई मुद्दा नहीं है। यह भाजपा के लिए मुद्दा हो सकता है। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सवाल उठाया था कि पुनिया को स्पष्ट करना चाहिए कि ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पर उनकी पार्टी का स्टैंड क्या है।
पदाधिकारियों ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में लोग विधायक और मंत्री से नाराज हैं। इस पर पुनिया ने प्रभारी मंत्रियों को जिले में 15-15 दिन दौरा करके समस्याएं सुलझाने की बात कही। पुनिया ने सभी पदाधिकारियों से उनके प्रभार जिलों के कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं की समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने सत्ता और संगठन के तालमेल पर जोर दिया।
प्रभारी मंत्री जब भी जिलों में जाएं, जिला कांग्रेस कार्यालय जरूर जाएं और कार्यकर्ताओं से मिलें। सरकार के कामकाज निर्णय का प्रचार होना चाहिए। संगठन के पुराने पदाधिकारियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाए। निकाय और पंचायत के निर्वाचित पदाधिकारियों की संगठन में भागीदारी की समीक्षा हो।



