अमेरिका के कश्मीर पर दखल पर कांग्रेस का सवाल – क्या भारत ने तीसरे देश की मध्यस्थता मान ली?

अमेरिका का ‘सीज़फायर’ ऐलान: कांग्रेस ने उठाए सवाल- क्या भारत ने कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता मान ली है? यह सवाल कांग्रेस ने अमेरिका द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच अचानक ‘सीज़फायर’ की घोषणा के बाद उठाया है। कांग्रेस का मानना है कि यह घटना बेहद असामान्य है और भारत की विदेश नीति के खिलाफ है।
अमेरिका की मध्यस्थता: क्या यह जायज़ है?-अमेरिका द्वारा ‘न्यूट्रल साइट’ पर बातचीत की बात कहना कांग्रेस को चिंता में डाल रहा है। क्या अमेरिका को यह अधिकार है कि वह तय करे कि भारत और पाकिस्तान कब, कहाँ और कैसे बात करें? कांग्रेस ने सरकार से इस मामले में पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की मांग की है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अमेरिका द्वारा यह कदम उठाकर कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाने की कोशिश की जा रही है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। कश्मीर हमेशा से द्विपक्षीय मुद्दा रहा है और किसी तीसरे पक्ष की दखलअंदाज़ी स्वीकार्य नहीं है।
PoK पर कोई समझौता नहीं: कांग्रेस का रुख-कांग्रेस ने याद दिलाया कि 1994 में संसद ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत का अभिन्न अंग मानने का प्रस्ताव पारित किया था। कांग्रेस ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या इस रुख में कोई बदलाव आया है या कूटनीतिक बातचीत के लिए कोई नई शर्तें तय हुई हैं। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीज़फायर की शर्तें और भविष्य की रणनीति-कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि अमेरिका के ऐलान के बाद भारत और पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला क्यों किया? क्या यह किसी दबाव में लिया गया फैसला है? अगर हाँ, तो सरकार ने किन शर्तों पर यह फैसला लिया है? भविष्य में इस तरह के हमलों को रोकने के लिए क्या रणनीति है? इन सवालों के जवाब जानना बेहद ज़रूरी है ताकि देश की सुरक्षा और विदेश नीति की स्पष्टता सुनिश्चित हो सके।अमेरिका के गलत तथ्य और भारत की स्थिति-अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान पर भी कांग्रेस ने नाराज़गी जताई है जिसमें उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान हज़ारों सालों से लड़ रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि यह ऐतिहासिक रूप से गलत है और अमेरिका भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू में तौलने की कोशिश कर रहा है। इस तरह की बयानबाज़ी से भारत की स्थिति को नुकसान पहुँच सकता है और सरकार को इस पर तुरंत जवाब देना चाहिए।
सभी पार्टियों को विश्वास में ले सरकार: कांग्रेस की अपील- अंत में, कांग्रेस ने सरकार से अपील की है कि वह तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाए और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी पार्टियों को विश्वास में ले। कांग्रेस का मानना है कि देश की जनता और विपक्ष को भी इन ताज़ा घटनाओं पर पूरी जानकारी दी जानी चाहिए ताकि देश की सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर सभी का विश्वास बना रहे।



