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वक्फ संशोधन 2025: क्या हटाया गया, क्या जोड़ा गया – 1995 के मुकाबले जानिए 10 बदलाव

वक्फ संशोधन बिल 2025: संसद से पास हुआ नया बिल, जानिए पुराने कानून से कैसे है अलग वक्फ संशोधन बिल 2025 अब संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — से पास हो चुका है। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और उनके हस्ताक्षर के बाद ये कानून बन जाएगा। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि 1995 में जो वक्फ कानून बना था, उसमें इस बार क्या बड़े बदलाव किए गए हैं। इस लेख में हम आपको 1995 के वक्फ कानून और 2025 के संशोधित बिल के बीच 10 ऐसे बड़े फर्क बताएंगे, जो इस बिल को खास बनाते हैं। इन्हीं बातों को लेकर मुस्लिम समुदाय में इस बिल का विरोध भी देखा जा रहा है। तो आइए जानते हैं वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के बीच के अहम बदलाव: 1. नाम में बदलाव पुराने कानून का नाम सिर्फ ‘वक्फ अधिनियम, 1995’ था। अब नए बिल का नाम ‘यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट’ रखा गया है। 2. अपील की सुविधा 1995 वाले कानून के मुताबिक अगर वक्फ बोर्ड किसी ज़मीन पर दावा करता था, तो उसके मालिक को सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल में ही अपील करने का हक था। लेकिन 2025 के बिल में अब मालिक रेवेन्यू कोर्ट, सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में भी अपील कर सकता है। 3. वक्फ-अलल-औलाद का प्रावधान हटाया गया पुराने कानून में मुसलमान व्यक्ति अपनी संपत्ति को ‘वक्फ-अलल-औलाद’ के तहत अपने बच्चों या परिवार के लिए दान कर सकता था। नए बिल में ये विकल्प हटा दिया गया है। अब संपत्ति की वक्फ घोषणा या बंदोबस्ती की ही अनुमति है। साथ ही, दान करने वाला कम से कम 5 साल से मुस्लिम होना चाहिए और महिला उत्तराधिकारियों को संपत्ति से बाहर नहीं किया जा सकता।

4. ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देने का विकल्प 1995 के कानून में वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम होता था और उसे चुनौती नहीं दी जा सकती थी। अब 2025 के बिल में ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। 5. महिला सदस्य अनिवार्य
पहले वक्फ बोर्ड में किसी महिला की नियुक्ति नहीं होती थी। अब नए कानून में वक्फ बोर्ड में कम से कम 2 महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। 6. अन्य धर्मों के लोग भी बोर्ड में शामिल हो सकेंगे पहले सिर्फ मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति होती थी। अब 2025 के बिल के मुताबिक, अन्य धर्मों के 2 लोगों को भी वक्फ बोर्ड में जगह दी जा सकती है। 7. जमीन की वक्फ घोषणा के नियम सख्त  पहले किसी भी जमीन पर अगर मस्जिद या दरगाह बन जाती थी या इस्लामिक कार्य होते थे, तो वह जमीन खुद-ब-खुद वक्फ संपत्ति मानी जाती थी। अब नए बिल में कहा गया है कि जब तक कोई व्यक्ति ज़मीन को वक्फ के तौर पर घोषित नहीं करता, वो वक्फ संपत्ति नहीं मानी जाएगी, चाहे वहां धार्मिक निर्माण क्यों ना हो। 8. वक्फ तय करने का अधिकार खत्म  1995 में वक्फ बोर्ड के पास किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की शक्ति होती थी। अब नए कानून में ये अधिकार हटा लिया गया है । 9. सर्वे का तरीका बदला गया  पहले वक्फ की संपत्तियों का सर्वे वक्फ बोर्ड के द्वारा नियुक्त अफसर (सर्वेक्षण आयुक्त आदि) करते थे। अब नए नियम के तहत कलेक्टर को सर्वे करने का अधिकार दिया गया है, वो भी राज्य के रेवेन्यू कानूनों के अनुसार। 10. ऑडिट और पंजीकरण की जिम्मेदारी अब केंद्र पर पहले राज्य सरकारें जब चाहें, वक्फ के खातों का ऑडिट कर सकती थीं। अब 2025 के बिल के तहत वक्फ संपत्ति के पंजीकरण, ऑडिट और रिकॉर्ड्स से जुड़े नियम केंद्र सरकार तय करेगी, और ऑडिट का जिम्मा CAG या केंद्र द्वारा नामित अधिकारी को दिया जाएगा।

 

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