छत्तीसगढ़ की बेटी, उत्तराखंड की शेरनी – IPS श्वेता चौबे को स्वतंत्रता दिवस पर मिला बड़ा सम्मान

उत्तराखंड की वो IPS जो मुश्किलों में बनी ढाल, सीएम पदक से हुईं सम्मानित!
आफत के बीच हिम्मत की मिसाल-इस बार 79वें स्वतंत्रता दिवस पर उत्तराखंड सरकार ने कई सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को उनके शानदार काम के लिए इनाम दिया, लेकिन एक नाम ऐसा था जिसने पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित कर दिया। ये नाम है IPS श्वेता चौबे का, जिन्हें मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से नवाजा गया। जब उत्तराखंड में बादल फटने से हालात बहुत खराब थे, तब एक खास टीम बनाई गई थी जिसमें श्वेता चौबे भी शामिल थीं। उन्होंने अपनी लीडरशिप और तुरंत फैसले लेने की काबिलियत से राहत और बचाव के काम में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। यह सम्मान उनके समर्पण और बहादुरी को दिखाता है।
पिता की विरासत, बेटी की पहचान-IPS श्वेता चौबे के पिता, विजय शंकर चौबे भी एक IPS अधिकारी थे, जिन्होंने दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार जीता और बाद में छत्तीसगढ़ के DGP भी बने। सारंगढ़ के रहने वाले विजय शंकर चौबे ने अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ पुलिस को समर्पित कर दिया। इसी वजह से श्वेता का बचपन छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बीता। पिता की मेहनत और ईमानदारी ने श्वेता को बचपन से ही बहुत प्रेरित किया। यही वजह है कि आज वो अपने काम के प्रति इतनी निडर और मजबूत हैं।
DSP से IPS तक का शानदार सफर-छत्तीसगढ़ में ही पली-बढ़ीं श्वेता ने UKPSC की परीक्षा पास करके DSP के तौर पर अपनी नौकरी शुरू की। अपने काम में उन्होंने इतनी ईमानदारी और लगन दिखाई कि लोग उन्हें उनके पद से ज्यादा उनके काम से जानने लगे। बाद में, डिपार्टमेंटल प्रमोशन के ज़रिए उन्हें IPS बनने का मौका मिला। अपने कामों के दम पर उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक पूरा किया और इसी वजह से उन्हें “उत्तराखंड की शेरनी” के नाम से भी जाना जाने लगा।
सम्मानों का सिलसिला जारी है-पिछले साल IPS श्वेता चौबे को उनके बेहतरीन कामों के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार देने का ऐलान हुआ था और 26 जनवरी 2025 को उन्हें यह सम्मान मिला भी। इसी साल, महिलाओं की सुरक्षा के लिए चलाए गए “ऑपरेशन पिंक” में उनके अच्छे काम के लिए उन्हें स्कोच अवॉर्ड भी मिला। और अब, स्वतंत्रता दिवस 2025 पर उत्तराखंड सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया है।
छत्तीसगढ़ की बेटी, उत्तराखंड का गौरव-IPS श्वेता चौबे ने अपने काम से सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक मिसाल कायम की है। अपनी मेहनत, हिम्मत और ईमानदारी से वो लगातार छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रही हैं। “छत्तीसगढ़ की बेटी” आज “उत्तराखंड की शेरनी” बनकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हैं और पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं।



