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अमेरिकी टैक्स का झटका! अब 40 देशों में कपड़ा निर्यात बढ़ाने की तैयारी कर रहा भारत

अमेरिका के नए टैक्स का भारत पर असर: निर्यातकों के लिए बड़ी चिंता!

अमेरिका का बड़ा फैसला: भारतीय सामानों पर 50% तक टैक्स!-सोचिए, अमेरिका ने अचानक हमारे देश के सामानों पर 50% तक का टैक्स लगा दिया है। इससे हमारे करीब 48 अरब डॉलर के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा मार तो टेक्सटाइल, गहने, चमड़े का सामान, केमिकल और मशीनों के कारोबार पर पड़ने वाली है। खासकर टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जो अमेरिका में 10.3 अरब डॉलर का कारोबार करती है, इस वक्त बहुत मुश्किल में है। इंडस्ट्री के लोग कह रहे हैं कि इतने भारी टैक्स के बाद भारतीय सामानों के लिए अमेरिकी बाज़ार में टिकना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। यह वाकई एक बड़ा झटका है।

सरकार की नई चाल: 40 देशों में चलेगा ‘खास पहुंच’ का कार्यक्रम-इस नुकसान की भरपाई के लिए हमारी सरकार ने एक शानदार प्लान बनाया है। अब भारत 40 ऐसे देशों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश करेगा जहाँ से अच्छा निर्यात हो सकता है। इनमें यूके, जापान, साउथ कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे बड़े और महत्वपूर्ण बाज़ार शामिल हैं। सरकार इन देशों में भारत को एक भरोसेमंद और बढ़िया क्वालिटी वाले सप्लायर के तौर पर पेश करेगी। अभी ग्लोबल टेक्सटाइल बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 5-6% है, और इस प्रोग्राम का मकसद है कि इसे बढ़ाया जाए।

590 अरब डॉलर का खुला बाज़ार: भारत के लिए सुनहरा मौका!-ये 40 देश मिलकर हर साल 590 अरब डॉलर से भी ज़्यादा का टेक्सटाइल और कपड़े खरीदते हैं। तो आप समझ सकते हैं कि भारत के लिए यह कितना बड़ा मौका है! अभी हम 220 से ज़्यादा देशों को सामान भेजते हैं, लेकिन अगर इन 40 चुनिंदा देशों पर ध्यान केंद्रित किया जाए, तो हम अपने बाज़ार का हिस्सा काफी बढ़ा सकते हैं। जानकारों का मानना है कि अगर भारत ने सही रणनीति अपनाई, तो आने वाले सालों में हमारा निर्यात कई गुना बढ़ सकता है। यह वाकई में एक सुनहरा अवसर है।

EPCs बनेंगे इस प्लान की जान: हर कदम पर मदद-इस पूरी योजना को सफल बनाने में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स (EPCs) की भूमिका बहुत अहम होगी। ये संस्थाएं हर देश के बाज़ार का पूरा नक्शा तैयार करेंगी। वे यह पता लगाएंगी कि किस चीज़ की सबसे ज़्यादा मांग है और फिर भारत के खास प्रोडक्शन सेंटर्स, जैसे सूरत, तिरुपुर और भदोही को सीधे उन बाज़ारों से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, ये काउंसिल्स अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और व्यापार मेलों में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर भी काम करेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि ‘ब्रांड इंडिया’ को दुनिया के सामने एक मजबूत पहचान दिलाई जाए।

इंडस्ट्री की गुहार: सरकार से चाहिए तत्काल राहत!-अमेरिकी बाज़ार से बाहर होने की कगार पर खड़ा भारतीय टेक्सटाइल उद्योग अब सरकार से सीधी मदद की उम्मीद कर रहा है। AEPC के सचिव मिथिलेश्वर ठाकुर बताते हैं कि पहले जो 25% टैक्स था, उसे तो किसी तरह झेल लिया था, लेकिन अब 50% टैक्स ने तो कमर ही तोड़ दी है। खासकर तब, जब बांग्लादेश, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों को भारत के मुकाबले 30% तक का फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार से फौरन आर्थिक मदद मिलनी बहुत ज़रूरी है ताकि इंडस्ट्री इस मुश्किल दौर से निकल सके और आगे बढ़ पाए।

नए बाज़ारों की ओर भारतीय उद्योग: अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिश-इस मुश्किल वक्त में, भारतीय उद्योग अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए नए बाज़ारों की तलाश में जुट गया है। यूके और EFTA देशों (जैसे स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन) के साथ व्यापार समझौते से उम्मीद है कि अमेरिका में हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि अगर ग्राहक एक बार किसी दूसरे देश की ओर मुड़ जाते हैं, तो उन्हें वापस लाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में, भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।

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