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ट्रंप प्रशासन का नया प्रस्ताव: विदेशी छात्रों और मीडिया कर्मियों के वीज़ा की अवधि होगी सीमित

अमेरिका में वीज़ा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी! विदेशी छात्र और मीडिया पर पड़ेगा असर!

ट्रंप सरकार का सख्त रुख: इमिग्रेशन पर कसी जा रही है लगाम!-अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार एक बार फिर विदेशी छात्रों और मीडिया से जुड़े लोगों के वीज़ा की अवधि को सीमित करने का प्रस्ताव लेकर आई है। इस कदम के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे देश में गैरकानूनी तरीके से आने वाले लोगों और वीज़ा नियमों के दुरुपयोग पर लगाम कसी जा सकेगी। दरअसल, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ लोग पढ़ाई या काम का बहाना बनाकर अमेरिका में तय अवधि से ज़्यादा समय तक रुक जाते हैं। यह नई पहल देश की सुरक्षा को मजबूत करने और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है।

अनिश्चित काल तक रुकने का खेल खत्म! अब नहीं मिलेगा लंबा आराम!-पहले, 1978 से लागू नियम के तहत विदेशी छात्रों को ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (DOS) के तहत अमेरिका में अनिश्चित काल तक रहने की अनुमति थी। इसका मतलब था कि छात्र अपनी पढ़ाई खत्म होने के बाद भी बिना किसी खास जांच के सालों तक अमेरिका में रुक सकते थे। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस ढील का फायदा उठाकर बहुत से लोग असल में पढ़ाई के बजाय अमेरिका में बसने की कोशिश करते हैं। इसी को रोकने के लिए यह नया प्रस्ताव लाया गया है, ताकि वीज़ा नियमों का पालन सही तरीके से हो।

छात्रों के लिए नए नियम: पढ़ाई जितनी, वीज़ा भी उतना!-प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, विदेशी छात्रों को वीज़ा उनकी पढ़ाई या कोर्स की अवधि तक ही मिलेगा, जो ज़्यादा से ज़्यादा चार साल हो सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि छात्र केवल उतने ही समय के लिए अमेरिका में रह पाएंगे जितने समय का उनका कोर्स होगा। इस नियम से उन लोगों पर अंकुश लगेगा जो बार-बार कोर्स बदलकर या अन्य बहाने बनाकर अमेरिका में अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रुकते हैं। यह कदम वीज़ा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मीडिया कर्मियों पर भी पड़ेगा असर: समय सीमा तय!-अमेरिका में ‘I’ वीज़ा पर काम करने वाले विदेशी पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए भी यह बदलाव लागू होंगे। पहले उन्हें आसानी से पांच साल तक का वीज़ा मिल जाता था, जिसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती थी। लेकिन अब नए प्रस्ताव के तहत, उन्हें शुरुआत में केवल 240 दिनों का वीज़ा मिलेगा। इसके बाद, वे चाहें तो इसे अधिकतम 240 दिनों के लिए ही बढ़वा सकते हैं। यह बदलाव यह सुनिश्चित करेगा कि मीडिया कर्मी अपने काम के उद्देश्य से ही अमेरिका में रहें और वीज़ा का दुरुपयोग न हो।

बार-बार होगी जांच: अब नहीं बच पाएंगे कोई भी!-इस प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि जो भी विदेशी छात्र, एक्सचेंज विज़िटर या मीडिया कर्मी अपनी तय वीज़ा अवधि से ज़्यादा समय तक अमेरिका में रहना चाहते हैं, उन्हें अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (USCIS) से विशेष अनुमति लेनी होगी। इसका मतलब है कि उन्हें समय-समय पर अपनी गतिविधियों की जांच और समीक्षा करवानी पड़ेगी। यह प्रक्रिया सरकार को यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी वैध कारण के लंबे समय तक देश में न टिका रहे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।

2020 का प्रस्ताव, 2021 में वापसी, और अब फिर से वापसी!-यह कोई नया प्रस्ताव नहीं है। दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने सबसे पहले 2020 में ऐसे ही नियमों का प्रस्ताव रखा था। लेकिन जब जो बाइडन प्रशासन सत्ता में आया, तो उन्होंने 2021 में इस प्रस्ताव को वापस ले लिया था। अब एक बार फिर, ऐसा लगता है कि ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन को लेकर अपनी पुरानी नीतियों पर लौट रहा है और इस प्रस्ताव को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है, ताकि देश में आने वाले लोगों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

क्यों उठाया गया यह सख्त कदम? जानिए असली वजह!-ट्रंप प्रशासन का कहना है कि लंबे समय से विदेशी छात्र और मीडिया कर्मी अमेरिका की उदार वीज़ा नीतियों का अनुचित लाभ उठाते रहे हैं। वे अक्सर अपने कोर्स या असाइनमेंट बदलते रहते हैं और इस तरह अमेरिका में लंबे समय तक बने रहते हैं। इससे न केवल देश की सुरक्षा को खतरा होता है, बल्कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे पर भी अनावश्यक बोझ पड़ता है। नए नियम यह सुनिश्चित करेंगे कि वीज़ा का उपयोग केवल उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हो और कोई भी इसका दुरुपयोग न कर सके।

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