मायावती से माफी मांगते हुए बोले अशोक सिद्धार्थ – “अब दोबारा गलती नहीं करूंगा”

मायावती से माफ़ी की गुहार: क्या अशोक सिद्धार्थ की होगी BSP में वापसी?
पछतावे का इज़हार और माफ़ी की अपील-बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक बड़े और जाने-माने नेता, अशोक सिद्धार्थ, ने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पार्टी के अंदरूनी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नेता, मायावती, से माफी मांगी है। सिद्धार्थ ने स्वीकार किया है कि पार्टी में रहते हुए उनसे कुछ गलतियाँ हुई थीं, जिनका उन्हें गहरा अफसोस है। उन्होंने बड़े ही विनम्र भाव से मायावती के चरणों में अपना सिर झुकाकर क्षमा याचना की है, जो उनके पश्चाताप को दर्शाता है। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पार्टी से निष्कासन के बाद का रुख-यह याद दिलाना ज़रूरी है कि इसी साल 12 जनवरी को मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को BSP से निष्कासित कर दिया था। सिद्धार्थ, जो लंबे समय तक पार्टी के एक महत्वपूर्ण चेहरे रहे थे, अब वापसी की राह तलाश रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश लिखकर यह भरोसा दिलाया है कि वे भविष्य में कभी भी पार्टी के अनुशासन को नहीं तोड़ेंगे और केवल मायावती के दिखाए रास्ते पर ही चलेंगे। यह बयान उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा और मायावती के नेतृत्व के प्रति सम्मान को जाहिर करता है।
‘बहनजी’ से दूसरा मौका पाने की उम्मीद-अशोक सिद्धार्थ ने अपनी अपील में कहा है कि अगर ‘बहनजी’ (मायावती) उन्हें माफ कर देती हैं और एक और मौका देती हैं, तो यह उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य होगा। उन्होंने यह भी वादा किया है कि अब वे किसी भी तरह की गलती दोबारा नहीं करेंगे। वे पार्टी के अनुशासन और विचारधारा के दायरे में रहकर ही काम करेंगे और कभी भी अपने निजी संबंधों का गलत फायदा नहीं उठाएंगे। यह उनके द्वारा की गई गलतियों से सीख लेने और पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से साबित करने का प्रयास है।
मायावती के संघर्ष को किया याद-अपने संदेश में, अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के अथक संघर्ष और उनके योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मायावती ने अपना पूरा जीवन दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है। अनेक बाधाओं और मुश्किलों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने करोड़ों लोगों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। सिद्धार्थ ने हाथ जोड़कर उनसे माफी मांगी और पार्टी में वापसी की गुहार लगाई, जो उनके मन में पार्टी के प्रति गहरी भावना को दर्शाता है।
BSP में परिवार और नेताओं की भूमिका-हाल के दिनों में BSP में कई अहम राजनीतिक बदलाव हुए हैं। 29 अगस्त को मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया था, जो पार्टी में दूसरा सबसे बड़ा पद माना जाता है। हालांकि, कुछ ही समय बाद, 2 मार्च को, उन्होंने आकाश को सभी पदों से हटा दिया और उनके पिता, आनंद कुमार, को यह जिम्मेदारी सौंपी। यह दिखाता है कि पार्टी में नेतृत्व और अनुशासन को लेकर मायावती का रुख कितना सख्त है।
आकाश आनंद की वापसी का सबक-दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल में आकाश आनंद ने भी मायावती से माफी मांगी थी और पार्टी में लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने खुद को मायावती का ‘राजनीतिक गुरु’ मानते हुए यह अपील की थी। इसके बाद, 19 मई को मायावती ने उन्हें फिर से BSP का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया। अब अशोक सिद्धार्थ भी इसी राह पर चलते हुए पार्टी में अपनी जगह वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं, जो BSP के अंदरूनी समीकरणों को समझने में मदद करता है।
सियासी समीकरण और भविष्य की राह-BSP की राजनीति में परिवार और पुराने नेताओं की भूमिका हमेशा चर्चा का विषय रही है। अशोक सिद्धार्थ का यह माफीनामा और आकाश आनंद की हालिया वापसी, यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि मायावती पार्टी में अनुशासन और नियंत्रण को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मायावती अशोक सिद्धार्थ को भी माफ कर उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल होने का अवसर देती हैं, या फिर यह वापसी केवल एक उम्मीद बनकर रह जाती है।



