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रूस-भारत तेल सौदा: अफवाहों पर विराम, ऊर्जा साझेदारी पर कायम भरोसा

रूस ने तोड़ी चुप्पी: भारत-रूस रिश्तों में दरार की खबरें बेबुनियाद-हाल ही में भारत और रूस के बीच रिश्तों को लेकर जो कयास लगाए जा रहे थे, उन पर अब रूस ने साफ शब्दों में जवाब दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि भारत और रूस की ऊर्जा साझेदारी में कोई बदलाव नहीं होगा। दोनों देशों का यह व्यापार आपसी फायदे और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए जरूरी है।

रूस का साफ बयान: भारत कोई नया खरीदार नहीं है-क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी भारत के पक्ष में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला अकेला देश नहीं है, बल्कि भारत कई देशों से तेल खरीदता रहा है। यह कोई नई व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही एक सामान्य और लाभकारी व्यापारिक प्रक्रिया है, जिसमें राजनीतिक दबाव का कोई सवाल नहीं है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा बनी सर्वोच्च प्राथमिकता-भारत सरकार ने भी संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी चिंता है। वैश्विक हालात और बाजार की स्थिति को देखते हुए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह की कमी न हो।

अमेरिका दौरे पर जयशंकर, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा-यह बयान ऐसे वक्त में आए हैं जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका दौरे पर हैं। वहां वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया और यूक्रेन युद्ध जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही खनिज सुरक्षा और ‘FORGE’ पहल जैसे सहयोग को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

पुराने भरोसेमंद साथी रूस के साथ तेल साझेदारी जारी-भारत अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है, लेकिन रूस के ताजा बयान यह साफ करते हैं कि भारत ने अपने पुराने और भरोसेमंद तेल सप्लायर से दूरी बनाने का कोई इरादा नहीं रखा है। भारत अपनी जरूरतों और हितों के अनुसार संतुलित और समझदारी भरी नीति पर कायम है।

 

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