एमपी में नई वोटर लिस्ट जारी: 34 लाख नाम हटे, उज्जैन दक्षिण में विवाद से बढ़ी सियासी हलचल

मध्यप्रदेश की अंतिम मतदाता सूची जारी: 34 लाख नाम हटने से सियासत गरमाई-मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद राज्य की अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है। इस प्रक्रिया में लाखों नाम हटाए गए हैं, जिससे मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव आया है और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
अंतिम मतदाता सूची में कुल 5.39 करोड़ मतदाता, 34 लाख नाम हटाए गए-मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार झा ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद मध्यप्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में कुल 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 मतदाता शामिल हैं। इससे पहले सूची में 5 करोड़ 74 लाख से अधिक नाम थे, जिनमें से करीब 34 लाख नाम हटाए गए हैं।
दावा-आपत्ति के बाद तैयार हुई सूची, सभी पक्षों का सहयोग मिला-मतदाता सूची बनाने में प्रशासन, मीडिया और राजनीतिक दलों ने सहयोग दिया। कुल 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 मतदाताओं में से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 से गणना पत्र प्राप्त हुए और डेटा को डिजिटल रूप में अपडेट किया गया। यह प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की गई।
पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर मतदाताओं का पूरा आंकड़ा सामने आया-नई सूची में 2 करोड़ 89 लाख 4 हजार 975 पुरुष, 2 करोड़ 60 लाख 75 हजार 186 महिला और 904 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। यह आंकड़ा सही और सटीक मतदाता सूची बनाने की कोशिश का परिणाम है, जिससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
उज्जैन दक्षिण में 33 हजार से ज्यादा नाम हटने पर विवाद-उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 33,256 मतदाताओं के नाम हटाए जाने से विवाद बढ़ गया है। इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं और क्षेत्र में असंतोष फैल गया है।
दिग्विजय सिंह ने जांच और कार्रवाई की मांग की-पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। इस कदम से मामला और चर्चा में आ गया है।
फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग-कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर कई मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने की अपील की। इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है।
मध्यप्रदेश की मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने चुनावी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें जांच के नतीजों और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जो प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।



