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तमिलनाडु चुनाव से पहले DMK ने शुरू की सीट बंटवारे की तैयारी, सहयोगी दलों से बातचीत शुरू, कांग्रेस को लेकर सस्पेंस बरकरार

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: DMK ने शुरू की सीट शेयरिंग की तैयारियां, गठबंधन की तस्वीर बनने लगी साफ-तमिलनाडु में अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे गठबंधन की तस्वीर साफ हो सके।

DMK ने बनाई 7 सदस्यीय कमेटी, वरिष्ठ नेताओं को दी जिम्मेदारी-सीटों के बंटवारे के लिए DMK ने एक सात सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसका नेतृत्व पार्टी के कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू कर रहे हैं। इस कमेटी में कई वरिष्ठ मंत्री और सांसद शामिल हैं, जिनका काम सहयोगी दलों से बातचीत कर सीटों का संतुलित बंटवारा सुनिश्चित करना है।

IUML से शुरू होगी पहली बातचीत, परंपरा का रखा गया सम्मान-DMK ने सबसे पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को सीट शेयरिंग पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। यह पार्टी की पुरानी परंपरा का हिस्सा है। आने वाले दिनों में अन्य सहयोगी दलों को भी एक-एक करके बातचीत के लिए बुलाया जाएगा।

सीटों की संख्या तय करने में लगेगा वक्त, कई दौर की बातचीत संभव-पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सीटों की संख्या एक बैठक में तय करना मुश्किल है। हर सहयोगी दल की अलग मांग होती है, इसलिए अलग-अलग दौरों में विस्तार से चर्चा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर एक दल के साथ दो या अधिक बार बातचीत भी हो सकती है।

कांग्रेस को सबसे अंत में बुलाया जा सकता है, छोटे दलों को पहले मौका-सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को बातचीत के लिए सबसे अंत में बुलाया जा सकता है। DMK पहले छोटे सहयोगी दलों की मांग सुनना चाहती है, फिर उन दलों से बात करेगी जो DMK के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ते हैं, और अंत में कांग्रेस से चर्चा होगी।

DMK और कांग्रेस के रिश्तों में दूरी, पावर शेयरिंग पर बढ़ा तनाव-हाल के दिनों में DMK और कांग्रेस के बीच मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस ने सरकार में हिस्सेदारी की मांग सार्वजनिक रूप से की, जिससे DMK नाराज है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहले ही साफ कर चुके हैं कि तमिलनाडु में पावर शेयरिंग का कोई प्रस्ताव नहीं है।

गठबंधन बढ़ने के बावजूद पुराने सहयोगियों की सीटें कम नहीं होंगी-DMK के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, नए दलों के जुड़ने के बावजूद पुराने सहयोगी दलों की सीटें कम नहीं की जाएंगी। 2021 में DMK ने करीब 180 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार सहयोगियों के लिए 10 से ज्यादा सीटें छोड़नी पड़ सकती हैं और पार्टी लगभग 160 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

कांग्रेस को मिल सकती हैं 25 से 30 सीटें, मांग है इससे ज्यादा-कांग्रेस इस बार 35 से 37 सीटों की मांग कर रही है और साथ ही राज्यसभा की एक सीट भी चाहती है। DMK फिलहाल कांग्रेस को 25 से 28 सीटें देने के पक्ष में है। अगर कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी रहती है, तो सीटों की संख्या बढ़ाकर 30 तक की जा सकती है।

अन्य सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका, CPI, CPI(M) और VCK की सीटें तय-दलित आधारित पार्टी VCK को इस बार लगभग आठ सीटें मिल सकती हैं, जो पहले छह थीं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को पहले की तरह छह-छह सीटें मिलने की संभावना है। इससे गठबंधन का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

जातीय संगठनों के नेताओं को भी सीट देने की तैयारी, सामाजिक समीकरण पर फोकस-DMK इस बार सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रभावशाली जातीय संगठनों के नेताओं को भी सीट देने की योजना बना रही है। इसका मकसद अलग-अलग समुदायों का समर्थन हासिल करना और चुनाव में मजबूत स्थिति बनाना है, जिससे पार्टी को व्यापक जनसमर्थन मिल सके।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए DMK की यह रणनीति गठबंधन को मजबूत करने और चुनावी मैदान में बेहतर प्रदर्शन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में सीट शेयरिंग की अंतिम रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।

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