‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पहुंची सुप्रीम कोर्ट, सोशल मीडिया का वायरल आंदोलन अब कानूनी घेरे में

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पहुंची सुप्रीम कोर्ट, सोशल मीडिया का वायरल आंदोलन अब कानूनी घेरे में-सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब कानूनी विवादों में फंसती नजर आ रही है। इस ऑनलाइन सटायरिकल मूवमेंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें इसकी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। बेरोजगारी और सिस्टम विरोधी नाराजगी को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब अदालत तक पहुंच चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या मांगा गया?-राजा चौधरी नाम के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग फर्जी वकालत और संदिग्ध लॉ डिग्री से जुड़े मामलों में शामिल हो सकते हैं। साथ ही अदालत की मौखिक टिप्पणियों के व्यावसायिक इस्तेमाल, ट्रेडमार्क और वायरल कंटेंट से कमाई की जांच की भी मांग की गई है। अभी कोर्ट की तरफ से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
इंस्टाग्राम अकाउंट को लेकर विवाद-CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट फिर से उनके नियंत्रण में आ गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लिखा, “हम वापस आ गए हैं।” इससे पहले उनका अकाउंट हैक होने का आरोप था। इस पोस्ट के बाद CJP फिर से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा और चर्चा तेज हो गई।
कॉकरोच जनता पार्टी क्या है?-कॉकरोच जनता पार्टी कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक डिजिटल सटायर और विरोध आंदोलन है। इसके समर्थक इसे बेरोजगारी, सामाजिक असमानता और सिस्टम की अनदेखी से परेशान युवाओं की आवाज मानते हैं। ‘कॉकरोच’ शब्द को वे संघर्ष और जिंदा रहने की ताकत के रूप में पेश करते हैं। सोशल मीडिया पर इसके मीम्स और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?-यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर दावा वायरल हुआ कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ से की थी। इसके बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम तेजी से ट्रेंड करने लगा। कई युवाओं ने इसे सिस्टम के खिलाफ डिजिटल विरोध के रूप में अपनाया, हालांकि इस दावे को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आईं।
कौन हैं अभिजीत दीपके?-CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया। 2020 से 2023 तक वे आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया और चुनावी टीम से जुड़े रहे। वे डिजिटल राजनीति और ऑनलाइन नैरेटिव बनाने में लंबे समय से सक्रिय हैं।
मजाक या नई डिजिटल राजनीति?-CJP को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ इसे बेरोजगार युवाओं की नई डिजिटल आवाज मानते हैं, तो कुछ इसे सिर्फ एक वायरल ट्रेंड कहते हैं। लेकिन इतना तय है कि सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन अब अदालत, राजनीति और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन चुका है। आगे देखना होगा कि यह केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित रहता है या बड़ा राजनीतिक संदेश बनता है।



