कैबिनेट विस्तार पर लगी ब्रेक, मोदी सरकार मानसून सत्र से पहले राजनीतिक रणनीति पर फोकस

कैबिनेट विस्तार पर क्यों लगी ब्रेक? मानसून सत्र से पहले मोदी सरकार की रणनीति आई सामने-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। राजनीतिक गलियारों में कैबिनेट विस्तार की चर्चा जोरों पर है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता संसद के आगामी मानसून सत्र के लिए मजबूत राजनीतिक रणनीति बनाना है। सरकार संवैधानिक विधेयकों पर काम कर रही है, जिनके लिए सिर्फ बहुमत नहीं, बल्कि सहयोगी दलों और अन्य सांसदों का समर्थन भी जरूरी होगा। ऐसे में कैबिनेट विस्तार फिलहाल टल सकता है।
मानसून सत्र से पहले सरकार की नजर बड़े विधेयकों पर-सूत्र बताते हैं कि सरकार मानसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवैधानिक विधेयक संसद में लाने की तैयारी कर रही है। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को अपने सांसदों के साथ-साथ एनडीए सहयोगियों और अन्य दलों का समर्थन भी चाहिए। इसलिए फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार की बजाय राजनीतिक समीकरण मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि संसद में किसी भी तरह की मुश्किल न आए। यह रणनीति सरकार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
कैबिनेट की कुर्सियां भी बन गई हैं राजनीतिक रणनीति का हिस्सा-मंत्रिमंडल में जगह देना अब सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। अगर मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार किया गया तो एनडीए के सहयोगी दल मंत्रालयों और बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग कर सकते हैं। इससे सरकार पर नए राजनीतिक दबाव आ सकते हैं। बीजेपी नेतृत्व फिलहाल ऐसे विवाद से बचना चाहता है। पार्टी का मानना है कि पहले संसद का सत्र सफलतापूर्वक पूरा हो, फिर राजनीतिक हालात के अनुसार विस्तार पर फैसला होगा।
बदलते राजनीतिक समीकरणों पर भी बीजेपी की नजर-बीजेपी न केवल एनडीए के अंदर की राजनीति पर, बल्कि विपक्ष में हो रहे बदलावों पर भी नजर रखे हुए है। हाल के महीनों में कई विपक्षी सांसद बीजेपी या एनडीए में शामिल हुए हैं और आगे भी कुछ नेताओं के आने की संभावना है। ऐसे में पार्टी मंत्रिपद खाली रखना चाहती है ताकि भविष्य में नए सहयोगियों को समायोजित किया जा सके। अगर अभी सभी पद भर दिए गए तो बाद में राजनीतिक बदलावों के हिसाब से फैसले लेना मुश्किल हो सकता है।
कई नामों की चर्चा, लेकिन बीजेपी ने बताया सिर्फ अटकलें-उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली समेत कई राज्यों के नेताओं को मंत्री बनाए जाने की अटकलें मीडिया में चल रही हैं। संभावित मंत्रियों की सूची भी सामने आई है। हालांकि बीजेपी के सूत्र इन चर्चाओं को केवल अटकलें बताते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट से जुड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं। इसलिए अभी चर्चा में आए नामों की पुष्टि नहीं की जा सकती। सही समय आने पर ही अंतिम फैसला होगा।
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद तेज हुई थीं चर्चाएं-केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद इस्तीफा देने से कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज हो गई थीं। माना जा रहा था कि सरकार जल्द बदलाव कर सकती है। लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह प्रक्रिया मानसून सत्र के बाद ही आगे बढ़ेगी। सरकार संसद में अपनी रणनीति मजबूत करने, सहयोगी दलों से तालमेल बनाए रखने और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ेगी। इसलिए फिलहाल कैबिनेट विस्तार टलता नजर आ रहा है।



