तिरुवनंतपुरम नगर निगम में अविश्वास प्रस्ताव पर सियासी घमासान, LDF ने UDF का साथ देने से किया इनकार

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल-केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने भाजपा के नेतृत्व वाले नगर निगम प्रशासन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन इस बीच वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा। LDF का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात और वैचारिक मतभेदों के कारण वह UDF के साथ इस मुद्दे पर खड़ा नहीं हो सकता। इससे नगर निगम की राजनीति में नया समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
LDF ने कहा- वैचारिक मतभेदों के कारण अभी समर्थन संभव नहीं-सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता वी. जॉय ने मीडिया से बातचीत में बताया कि UDF के अविश्वास प्रस्ताव का फिलहाल समर्थन करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि वैचारिक भी है। वर्तमान हालात में दोनों मोर्चों का साथ आना मुश्किल दिखता है। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियां बदलने पर पार्टी अपना रुख बदल सकती है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
UDF को अब भी LDF के समर्थन की उम्मीद-LDF के इनकार के बावजूद UDF ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। UDF संसदीय दल के नेता के. एस. सबरीनाथन का कहना है कि विपक्ष का काम जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना है और अविश्वास प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रशासन पिछले छह महीनों में नगर निगम की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम रहा है। इसलिए विपक्ष का अधिकार है कि वह प्रशासन से जवाब मांगे। उन्होंने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन से बेहतर है कि सदन में बहस हो और जनता के सामने सरकार की कार्यशैली पर चर्चा हो।
भाजपा प्रशासन पर लगाए गए कई गंभीर आरोप-UDF लगातार भाजपा के नेतृत्व वाले नगर निगम प्रशासन पर सुस्ती और विफलता के आरोप लगा रहा है। विपक्ष का कहना है कि शहर में कचरा प्रबंधन, आवारा कुत्तों की समस्या और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं में लगातार दिक्कतें आ रही हैं। इस मुद्दे को लेकर UDF ने 29 जून को नगर निगम कार्यालय के सामने प्रदर्शन का ऐलान भी किया है। विपक्ष का दावा है कि भाजपा प्रशासन जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया और अब उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इसी मकसद से अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
भाजपा ने कहा- विपक्ष को पूरा अधिकार, लेकिन सरकार स्थिर है-तिरुवनंतपुरम के मेयर वी. वी. राजेश ने विपक्ष के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को हर छह महीने में अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले से ही इस संभावना के लिए तैयार थी कि कांग्रेस और वाम दल कभी भी साथ आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सोमवार को होने वाली नगर निगम परिषद की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं होगी और बैठक तय एजेंडे के अनुसार चलेगी। नगर निगम का कामकाज बिना किसी बाधा के चलता रहेगा।
नगर निगम में संख्या बल भाजपा के पक्ष में-तिरुवनंतपुरम नगर निगम की कुल 101 सदस्यीय परिषद में भाजपा गठबंधन (NDA) के पास 50 पार्षद हैं और एक निर्दलीय सदस्य का समर्थन भी है। वहीं LDF के पास 29 और UDF के पास 20 पार्षद हैं। इस संख्या बल को देखते हुए भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। अगर LDF अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करता है तो UDF के लिए इसे सफल बनाना मुश्किल होगा। इसलिए आने वाले दिनों में सभी की नजर इस बात पर होगी कि क्या राजनीतिक हालात में कोई बदलाव आता है या भाजपा अपनी स्थिति बरकरार रखती है।



