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भारत को मिली बड़ी राहत! अमेरिका ने दी रूसी तेल खरीदने की अनुमति, जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी

वैश्विक तनाव और तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका ने भारत को एक अस्थायी राहत दी है। अमेरिका ने साफ कहा है कि भारत उन रूसी तेल की खेपों को खरीद सकता है जो पहले से समुद्र में जहाजों पर मौजूद हैं। यह फैसला वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने और कीमतों के दबाव को कम करने के लिए लिया गया है।

भारत को मिली अस्थायी अनुमति: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव का बयान-अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में बताया कि भारत को समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दुनिया में तेल की कमी नहीं है, लेकिन सप्लाई को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत पहले भी अमेरिका की अपील का सम्मान करते हुए प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद रोक चुका है और अमेरिकी तेल लेने की योजना बना रहा था।

वैश्विक बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम-अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला अस्थायी है ताकि समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल के करोड़ों बैरल जहाजों में पड़े रहने की वजह से सप्लाई प्रभावित न हो। थोड़े समय के लिए प्रतिबंध हटाने से बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

अमेरिका ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार-अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि अमेरिका अपने मित्र देशों, खासकर भारत के साथ मिलकर तेल की सप्लाई बनाए रखना चाहता है। उन्होंने बताया कि भारत इन जहाजों पर मौजूद तेल को खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस कर सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर दबाव कम होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव के बीच लिया गया फैसला-क्रिस राइट के अनुसार, लंबे समय के लिए तेल की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव के कारण सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसलिए अमेरिका ने यह अस्थायी कदम उठाया है ताकि तेल बाजार में अचानक उछाल न आए।

30 दिन की अस्थायी छूट, सीमित फायदा भारत को-अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भारत को दी गई यह छूट केवल 30 दिनों के लिए है। इस दौरान भारतीय रिफाइनरियां उन रूसी तेल की खेपों को खरीद सकती हैं जो 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुकी थीं। यह छूट केवल पहले से समुद्र में फंसे तेल तक सीमित है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा।

पहले लगाए गए थे 25 प्रतिशत टैरिफ-कुछ समय पहले अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत तक के अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था। बाद में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनी और इन टैरिफ को हटाने का फैसला लिया गया।

अमेरिका की उम्मीद: भारत बढ़ाएगा अमेरिकी तेल की खरीद-अमेरिकी प्रशासन मानता है कि भारत एक अहम रणनीतिक साझेदार है। अमेरिका को उम्मीद है कि भारत आने वाले समय में अमेरिकी तेल और गैस की खरीद को और बढ़ाएगा। फिलहाल जो छूट दी गई है, उसे केवल एक अस्थायी उपाय बताया जा रहा है ताकि पश्चिम एशिया के तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे।

अमेरिका द्वारा भारत को दी गई यह अस्थायी छूट वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश है। यह कदम खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव के बीच लिया गया है। हालांकि यह छूट सीमित समय के लिए है और रूस को इससे ज्यादा फायदा नहीं होगा। आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

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