बंगाल चुनाव 2026: ‘कमबैक’ की जंग, हार-हारकर लौटे नेता फिर मैदान में

बंगाल चुनाव 2026: ‘सेकेंड इनिंग’ में लौटे नेता, राजनीति में फिर से चमकने का मौका-पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 सिर्फ Trinamool Congress और BJP के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि कई नेताओं के लिए यह वापसी का सुनहरा मौका भी है। हार और विवाद के बाद ये नेता अब फिर से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन हैं ये ‘सेकेंड इनिंग’ के खिलाड़ी।
दिलीप घोष की बीजेपी में बड़ी वापसी-बीजेपी के दिलीप घोष इस चुनाव में सबसे बड़ा कमबैक मानें जा रहे हैं। खड़गपुर सदर से मैदान में उतरने वाले घोष ने 2016 में अपनी शुरुआत की थी। आरएसएस पृष्ठभूमि से आने वाले दिलीप अपनी बेबाकी और जमीन से जुड़ी राजनीति के लिए जाने जाते हैं। 2019 में उन्होंने बीजेपी को बंगाल में मजबूत किया था, हालांकि 2024 में हार के बाद कुछ समय के लिए वे पीछे हट गए थे, लेकिन अब फिर सक्रिय हो गए हैं।
संगठन से बाहर रहे नेताओं की वापसी-बीजेपी के रितेश तिवारी भी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सस्पेंड किए गए रितेश अब काशीपुर-बेलगछिया से टिकट लेकर फिर से चुनावी मैदान में हैं। यह दिखाता है कि बीजेपी पुराने अनुभवियों को फिर से मौका दे रही है ताकि चुनावी मुकाबला मजबूत हो सके।
टीएमसी में कुनाल घोष की वापसी-Trinamool Congress में कुनाल घोष की वापसी चर्चा में है। ममता बनर्जी के करीबी रहे कुनाल का करियर 2013 के सारधा चिटफंड घोटाले के बाद प्रभावित हुआ था। जेल में रहते हुए उन्होंने पार्टी की आलोचना भी की, लेकिन अब वे बेलेघाटा से उम्मीदवार हैं और अपनी राजनीतिक पहचान फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजीव बनर्जी की नई चुनौती-राजीव बनर्जी भी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। 2021 में बीजेपी छोड़कर टीएमसी में लौटे राजीव को देबरा से टिकट मिला है, जो उनका पुराना क्षेत्र नहीं है। अब उन्हें नए इलाके में संगठन मजबूत करना और जनता का भरोसा जीतना होगा।
ज्योति प्रिय मलिक की ‘इमेज’ की लड़ाई-ज्योति प्रिय मलिक, जिन्हें ‘बालू’ के नाम से जाना जाता है, इस चुनाव को अपनी राजनीतिक छवि सुधारने का मौका मानते हैं। राशन घोटाले के आरोप में जेल जाने के बाद उनकी छवि प्रभावित हुई थी। अब जमानत पर बाहर आकर हाबड़ा से चुनाव लड़ रहे मलिक के लिए यह जीत से ज्यादा अपनी साख बचाने की लड़ाई है।
कांग्रेस और अन्य दलों में भी वापसी की कोशिश-कमबैक की यह कहानी सिर्फ बीजेपी और टीएमसी तक सीमित नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी करीब तीन दशक बाद राज्य राजनीति में लौट रहे हैं। वहीं आईएसएफ के टिकट पर अरबुल इस्लाम भी अपनी राजनीतिक पहचान फिर से बनाने की कोशिश में हैं। यह दिखाता है कि बंगाल की राजनीति में वापसी का दरवाजा हमेशा खुला रहता है।
बंगाल में ‘कमबैक’ की राजनीति क्यों खास?-राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बंगाल के मतदाता उन नेताओं को पसंद करते हैं जो संघर्ष के बाद वापसी करते हैं। यहां हार के बाद भी अगर कोई नेता जनता से जुड़ा रहता है, तो उसे फिर मौका मिल सकता है। अनुभवी नेता जो जमीनी हालात समझते हैं, चुनाव जीतने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस बार ‘सेकेंड इनिंग’ वाले नेता सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
पश्चिम बंगाल के चुनाव 2026 में कई नेता अपनी दूसरी पारी खेलने को तैयार हैं। ये ‘सेकेंड इनिंग’ वाले खिलाड़ी न केवल अपनी राजनीतिक छवि सुधारना चाहते हैं, बल्कि पार्टी को भी मजबूत करना चाहते हैं। बंगाल की राजनीति में वापसी की यह कहानी हर बार नए उत्साह और उम्मीद लेकर आती है।



