मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर से बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव: जानिए कैसे हो रही है सुधार की प्रक्रिया

मध्यप्रदेश में बिजली व्यवस्था को और बेहतर, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इस बदलाव का असर अब साफ नजर आने लगा है। स्मार्ट मीटर की वजह से बिजली बिलिंग में सुधार हुआ है और बिजली कंपनियों के राजस्व में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। खासकर जबलपुर और भोपाल संभाग में स्मार्ट मीटर ने बिलिंग सिस्टम को मजबूत किया है। हालांकि कुछ उपभोक्ताओं ने बिल ज्यादा आने और तेज रीडिंग की शिकायत की है, लेकिन विभाग ने इन शिकायतों का समाधान भी किया है।
जबलपुर संभाग में स्मार्ट मीटर से बिलिंग दक्षता में सुधार-जबलपुर संभाग में स्मार्ट मीटर लगाने का सबसे बड़ा फायदा बिलिंग दक्षता में हुआ है। पहले यहां बिलिंग दक्षता 73.77 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 82.16 प्रतिशत हो गई है। यह सुधार बिजली विभाग के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत का सही डेटा मिल रहा है, जिससे बिलिंग में गड़बड़ी कम हुई है। इस सुधार के कारण बिजली कंपनी को करीब ₹314 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व भी मिला है। विभाग का मानना है कि जैसे-जैसे और ज्यादा उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगेंगे, बिलिंग दक्षता और राजस्व में और सुधार होगा।
लाखों उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं-जबलपुर संभाग में कुल 26.55 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत यानी 7.86 लाख उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। जबलपुर जिले में 6 लाख 28 हजार 953 उपभोक्ताओं में से 2 लाख 85 हजार 620 घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। नरसिंहपुर जिले में 2 लाख 15 हजार 651 उपभोक्ताओं में से करीब 57 प्रतिशत यानी 1 लाख 22 हजार के घरों में स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। बिजली विभाग का लक्ष्य है कि जल्द ही सभी उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लग जाएं, जिससे बिजली व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बन सके।
भोपाल संभाग में भी स्मार्ट मीटर से बेहतर बिलिंग और राजस्व-भोपाल संभाग में भी स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली बिलिंग में सुधार हुआ है। यहां बिलिंग दक्षता पहले 76.86 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 81.57 प्रतिशत हो गई है। इस सुधार के कारण बिजली कंपनी के राजस्व में ₹378 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। भोपाल संभाग में कुल 16.84 लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें से 5 लाख 9 हजार के घरों में स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। भोपाल जिले में 7 लाख 2 हजार 404 उपभोक्ताओं में से लगभग 50 प्रतिशत के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। यह साफ दिखाता है कि स्मार्ट मीटर बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
शिकायतें भी आईं, लेकिन विभाग ने किया समाधान-स्मार्ट मीटर लगने के बाद कुछ उपभोक्ताओं ने बिल ज्यादा आने और मीटर की तेज रीडिंग की शिकायतें भी की हैं। जबलपुर में 2023 से अब तक 55 हजार 822 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 55 हजार 736 का समाधान किया गया है। भोपाल संभाग में 2 हजार 102 शिकायतें आईं, जिनमें से 2 हजार 62 का निपटारा हो चुका है। विभाग का कहना है कि ज्यादातर शिकायतों का समय पर समाधान किया गया है और उपभोक्ताओं को सही जानकारी दी जा रही है। बिजली विभाग का मानना है कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग अधिक सटीक हुई है और उपभोक्ताओं को अपनी खपत की सही जानकारी मिल रही है।
स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य और भविष्य की योजना-स्मार्ट मीटर लगाने का मुख्य मकसद बिजली बिलिंग को पारदर्शी और सटीक बनाना है। ये मीटर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 2019 की अधिसूचना और मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता-2021 के अनुसार लगाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर से बिजली खपत का डेटा सीधे सिस्टम में रिकॉर्ड होता है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और बिलिंग में गड़बड़ी की संभावना घटती है। नए बिजली कनेक्शन अब प्री-पेमेंट स्मार्ट मीटर के साथ दिए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ता अपनी खपत के अनुसार पहले से भुगतान कर सकते हैं। बिजली विभाग का मानना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली व्यवस्था और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी, जिससे उपभोक्ताओं और विभाग दोनों को फायदा होगा।
मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया ने बिजली व्यवस्था में एक नई क्रांति ला दी है। बेहतर बिलिंग दक्षता, बढ़ा हुआ राजस्व और पारदर्शिता के कारण यह कदम बिजली विभाग और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। आने वाले समय में जब सभी उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लग जाएंगे, तो बिजली व्यवस्था और भी ज्यादा भरोसेमंद और आधुनिक हो जाएगी।



