ईरान में बड़ा राजनीतिक मोड़: क्या मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर?

ईरान में नया सुप्रीम लीडर: मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति और इसके मायने-मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच ईरान की राजनीति में एक बड़ी खबर सामने आई है। दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन इस खबर ने ईरान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। इस लेख में हम इस नियुक्ति के पीछे की कहानी, मोजतबा की भूमिका और इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
गुप्त बैठक में लिया गया अहम फैसला-ईरान की सबसे शक्तिशाली संस्था, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने एक गोपनीय बैठक में मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुनने का फैसला किया है। 28 फरवरी 2026 को अली खामेनेई के निधन के बाद से नए नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज थीं। इस बैठक ने देश की सत्ता में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं, जो आने वाले समय में ईरान की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
मोजतबा खामेनेई कौन हैं?-मोजतबा खामेनेई, जो 56 वर्ष के हैं, दिवंगत अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। वे लंबे समय से सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली शख्सियत माने जाते रहे हैं। धार्मिक रूप से मध्यम स्तर के मौलवी और ईरान-इराक युद्ध के दौरान सेना में सेवा देने वाले मोजतबा, सार्वजनिक मंचों पर कम दिखते हैं, लेकिन पिता के कार्यालय के कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
IRGC की भूमिका और दबाव-रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नियुक्ति में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की बड़ी भूमिका रही है। कहा जा रहा है कि IRGC ने असेंबली के सदस्यों पर मोजतबा के समर्थन के लिए दबाव डाला। मोजतबा के सैन्य नेतृत्व के साथ मजबूत संबंध उन्हें सेना के करीब लाते हैं, जो मौजूदा राजनीतिक माहौल में खास महत्व रखता है।
वंशानुगत शासन पर उठे सवाल-ईरान का इस्लामी गणराज्य 1979 की क्रांति के बाद से वंशानुगत शासन का विरोध करता रहा है। ऐसे में पिता के बाद बेटे का सत्ता में आना कई सवाल खड़े करता है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम देश को उसी व्यवस्था की ओर ले जा सकता है, जिसके खिलाफ कभी क्रांति हुई थी, जिससे राजनीतिक विवाद और बढ़ सकते हैं।
सुप्रीम लीडर चुनने की प्रक्रिया-ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर का चुनाव 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। उम्मीदवार का वरिष्ठ धार्मिक विद्वान होना और राजनीतिक समझ रखना जरूरी है। सुप्रीम लीडर के पास सेना, न्यायपालिका और विदेश नीति पर अंतिम अधिकार होता है। फिलहाल मोजतबा के पास कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं है, जिससे उनकी प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की राह क्या होगी?-ईरान में 40 दिनों का शोक मनाया जा रहा है। मोजतबा की नियुक्ति देश की आंतरिक स्थिरता और इजराइल-अमेरिका के साथ तनाव की दिशा तय कर सकती है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह फैसला ईरान को मजबूती देगा या नई चुनौतियां सामने लाएगा। इस राजनीतिक बदलाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।



