Google Analytics Meta Pixel
Politics

बिहार वोटर लिस्ट विवाद: विपक्ष ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का लगाया आरोप

 

बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में ‘घमासान’: क्या सब ठीक है?

बिहार में चुनाव का माहौल गरमा गया है और इस बीच वोटर लिस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं:

वोटर लिस्ट में ‘खेल’? विपक्षी दलों के आरोप

विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है। कांग्रेस का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर तैयार की गई लिस्ट को बीजेपी के इशारे पर “मैनेज” किया गया है। CPI(ML)L ने मांग की है कि जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं और इसके पीछे की वजहों को सार्वजनिक किया जाए। यह आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाते हैं।

लाखों नाम गायब: क्या है वजह?

चुनाव आयोग की ड्राफ्ट लिस्ट में 3.66 लाख नाम हटाए गए हैं, जिससे विपक्ष में नाराजगी है। CPI(ML)L का कहना है कि लगभग 21.53 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, लेकिन पुराने वोटरों के नामों को बहाल करने का कोई जिक्र नहीं है। महिलाओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए जाने पर चिंता जताई गई है। पार्टी का कहना है कि बिहार में लिंगानुपात पहले से ही 914 है, लेकिन SIR प्रक्रिया में यह घटकर 892 रह गया।

‘विदेशी’ बताकर नाम हटाना: क्या यह सही है?

इस विवाद में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। खबर है कि लगभग 6,000 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से इसलिए हटा दिए गए क्योंकि उन्हें ‘विदेशी’ करार दिया गया। CPI(ML)L ने मांग की है कि इन लोगों के नाम और उनके ‘नागरिकता संदिग्ध’ होने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। विपक्ष का कहना है कि यह पारदर्शिता और निष्पक्षता के खिलाफ है और इससे समाज के कमजोर वर्गों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।

अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल

सिर्फ वोटर लिस्ट ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुस्लिम, दलित और अन्य हाशिये पर खड़े समुदायों के अधिकारियों को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनकी जगह सामाजिक रूप से प्रभावशाली वर्गों के लोगों को चुनावी जिम्मेदारी दी जा रही है। विपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच की जाए और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाए।

कांग्रेस का ‘आरोप’: चुनाव आयोग पर सीधा हमला

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सुधारों के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि बिहार में जो कुछ हो रहा है, उसका मकसद सिर्फ बीजेपी और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचाना है। उन्होंने चुनाव आयोग को “बीजेपी की बी-टीम” बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने के बजाय EC खुली पक्षपात की राह पर चल रहा है।

वोटर लिस्ट में ‘चौंकाने वाली’ गड़बड़ियां

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक ही घर में 247 वोटर दर्ज मिले हैं और एक व्यक्ति का नाम एक ही बूथ पर तीन-तीन बार आ रहा है। जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई और चुनाव आयोग इस पर चुप क्यों है? उन्होंने कहा कि कई विधानसभा क्षेत्रों में जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उनकी संख्या पिछली बार के जीत-हार के अंतर से भी ज्यादा है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

विपक्ष की मांग: निष्पक्षता से काम करे EC

विपक्षी दलों ने एक बार फिर दोहराया है कि चुनाव आयोग को जल्दबाजी में SIR प्रक्रिया पूरी करने के बजाय निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां लोकतंत्र की जड़ को हिलाती हैं और जनता का भरोसा कमजोर करती हैं। विपक्ष की मांग है कि EC पक्षपात छोड़कर हर वोटर को न्याय दिलाने के लिए ईमानदारी से काम करे।

यह मामला बिहार चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button