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भारत-चीन रिश्तों पर चीन का बड़ा बयान: ‘प्रतिद्वंदी नहीं, साझेदार बनकर आगे बढ़ें दोनों देश’

भारत-चीन रिश्तों में नया मोड़: चीन के विदेश मंत्री का सहयोग और साझेदारी पर जोर-भारत और चीन के बीच रिश्तों को लेकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंदी या खतरे के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि साझेदार और अवसर के रूप में देखना चाहिए। उनका मानना है कि सहयोग से न केवल दोनों देशों को फायदा होगा, बल्कि पूरे एशिया में स्थिरता और विकास को भी बल मिलेगा।

चीन के विदेश मंत्री ने साझेदारी को बताया जरूरी-चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत और चीन को अपने रिश्तों को सुधारने के लिए सकारात्मक नजरिया अपनाना होगा। उन्होंने साफ कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंदी की बजाय साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उनका मानना है कि भरोसे और सहयोग का माहौल दोनों देशों के विकास के लिए फायदेमंद होगा, जबकि टकराव पूरे एशिया की प्रगति को प्रभावित कर सकता है।

मोदी-शी जिनपिंग की बैठकों ने बढ़ाई उम्मीदें-वांग यी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठकों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुलाकातों ने भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की है। 2024 में कजान में हुई बैठक और उसके बाद तियानजिन में हुई मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में मदद की है।

बढ़ता हुआ सहयोग और संपर्क-चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि हाल के समय में भारत और चीन के बीच कई स्तरों पर बातचीत और संपर्क बढ़े हैं। व्यापार के आंकड़े नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और लोगों के बीच भी आपसी संपर्क बढ़ रहा है। व्यापार, संस्कृति और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों के रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं।

सीमा पर शांति बनाए रखने की अपील-वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी की तरह संबंध बनाए रखने चाहिए और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनका मानना है कि सीमा पर शांति से दोनों देश अपने आर्थिक और सामाजिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी।

ग्लोबल साउथ में भारत-चीन की अहम भूमिका-चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण देश हैं और उनके बीच पुराने सभ्यतागत रिश्ते हैं। दोनों देशों के साझा हित हैं, जिन पर मिलकर काम किया जा सकता है। सहयोग से न केवल दोनों देशों का विकास होगा, बल्कि एशिया के पुनरुत्थान में भी मदद मिलेगी।

BRICS और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग-वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने BRICS जैसे मंचों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे द्वारा आयोजित सम्मेलनों का समर्थन करना चाहिए। इस साल भारत BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जबकि 2027 में चीन यह सम्मेलन आयोजित करेगा।

पिछले वर्षों में रिश्तों में आया तनाव-भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ सालों में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण तनाव बढ़ा था। करीब पांच साल तक दोनों देशों के संबंध लगभग ठहर गए थे। हालांकि 2024 में नेताओं की मुलाकातों के बाद धीरे-धीरे रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें वीजा और फ्लाइट सेवाओं को फिर से शुरू करना शामिल है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बयान से साफ होता है कि भारत-चीन रिश्तों में सुधार और सहयोग की नई उम्मीदें जगी हैं। दोनों देशों को एक-दूसरे को साझेदार के रूप में देखना होगा ताकि न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत हों, बल्कि पूरे एशिया में स्थिरता और विकास को भी बढ़ावा मिले। आने वाले समय में BRICS और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा।

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