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कांग्रेस का बड़ा हमला: ‘विदेश नीति में भारी चूक’, मोदी सरकार पर अमेरिका और पाकिस्तान को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस का मोदी सरकार की विदेश नीति पर कड़ा हमला: अमेरिका और पाकिस्तान को लेकर उठे गंभीर सवाल-कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर रविवार को तीखा आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान हालात में अमेरिका भारत को गंभीरता से नहीं ले रहा है और पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका सरकार की बड़ी नाकामी को दर्शाती है। कांग्रेस ने इसे कूटनीति और छवि प्रबंधन में भारी कमी बताया है।

अमेरिका के सामने मोदी सरकार कमजोर दिख रही है-कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका अब प्रधानमंत्री मोदी को ऐसे नेता के रूप में देख रहा है जो दबाव में आसानी से झुक जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कई बार अमेरिका को खुश करने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद भारत को कोई खास कूटनीतिक फायदा नहीं मिला। यह स्थिति देश की विदेश नीति के लिए चिंता का विषय है।

व्यापार समझौते में किसानों के हितों से समझौता-जयराम रमेश ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस डील में किसानों के हितों को नजरअंदाज किया गया है। अमेरिकी बाजार को भारतीय कृषि क्षेत्र में ज्यादा पहुंच देने से किसानों को नुकसान हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद भारत को कूटनीतिक मजबूती नहीं मिली। यह समझौता देश के लिए लाभकारी साबित नहीं हुआ।

पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका पर गहरी चिंता-कांग्रेस ने वेस्ट एशिया में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका के लिए एक माध्यम की तरह काम करता रहा है और अब उसकी अहमियत फिर से बढ़ना भारत की विदेश नीति की कमजोरी को दर्शाता है। यह स्थिति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है।

पाकिस्तान पर कांग्रेस का सख्त रुख-जयराम रमेश ने पाकिस्तान की स्थिति पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां लोकतंत्र कमजोर है और अर्थव्यवस्था बाहरी मदद पर निर्भर है। साथ ही, पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद से जुड़ा हुआ है और इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में देखा गया है। यह भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी कूटनीतिक लाभ नहीं-कांग्रेस ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य सफलता के बावजूद भारत को कूटनीतिक स्तर पर कोई खास फायदा नहीं मिला। पार्टी ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिलना सरकार की रणनीति की कमजोरी को दर्शाता है। यह विदेश नीति की बड़ी विफलता है।

ट्रंप और मोदी के रिश्तों पर उठे सवाल-कांग्रेस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के रिश्तों पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि ट्रंप द्वारा बार-बार दोस्ती की बात करने के बावजूद भारत को इसका कोई बड़ा लाभ नहीं मिला और पाकिस्तान की स्थिति मजबूत होती नजर आई। यह विदेश नीति की असफलता को दर्शाता है।

सरकार से जवाब की मांग-कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि आखिर क्यों और कैसे पाकिस्तान को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह मिल रही है। पार्टी ने देश की विदेश नीति को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया है ताकि भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर और सशक्त हो सके। सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की गई है।

कांग्रेस के आरोपों से साफ है कि देश की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिका और पाकिस्तान को लेकर उठाए गए सवाल सरकार के लिए चुनौती हैं। इस समय भारत को अपनी कूटनीति को मजबूत बनाकर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और बेहतर करना होगा ताकि देश की सुरक्षा और सम्मान दोनों सुनिश्चित हो सकें।

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