गोविंदा और सुनीता आहूजा की लव स्टोरी: संघर्ष, प्यार और रिश्ते की अनकही बातें

गोविंदा-सुनीता: तलाक की अफवाहों के बीच प्यार की मिसाल, सालों बाद भी अटूट है रिश्ता!
अफवाहों पर विराम: गणपति पूजा में साथ दिखे गोविंदा-सुनीता-हाल ही में गणपति पूजा के मौके पर बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर 1’ गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा को साथ देखकर फैंस का दिल खुश हो गया। पिछले कुछ समय से दोनों के बीच तलाक की खबरें उड़ रही थीं, जिसने उनके चाहने वालों को काफी चिंतित कर दिया था। लेकिन गणपति पूजा में सुनीता ने खुद इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा कि जब तक वो खुद कुछ न कहें, तब तक किसी भी बात पर यकीन न करें। यह बयान उनके मजबूत रिश्ते का सबूत है। 1987 में शादी के बंधन में बंधे इस जोड़े ने कई मुश्किलों का सामना किया है, लेकिन आज भी वे एक-दूसरे का सहारा बनकर खड़े हैं। उनका साथ देखकर यह साफ हो जाता है कि प्यार और विश्वास से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
कैसे हुई मुलाकात? गोविंदा को इम्प्रेस करने का अनोखा किस्सा-सुनीता आहूजा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी और गोविंदा की मुलाकात बहुत ही दिलचस्प तरीके से हुई थी। उस वक्त गोविंदा उनकी बहन के घर पर रहा करते थे और सुनीता स्कूल में पढ़ती थीं। एक बार उनके जीजाजी ने मजाक में कहा कि ‘एक लड़का आ रहा है, उसे इम्प्रेस करना।’ सुनीता ने इसे एक चुनौती की तरह लिया। उन्हें पता था कि गोविंदा ज्यादा बात नहीं करते, इसलिए उन्होंने ठान लिया कि वह गोविंदा का ध्यान अपनी ओर जरूर खींचेंगी। और देखिए, इसी शरारत ने दोनों को इतना करीब ला दिया कि यह रिश्ता प्यार और फिर शादी तक पहुँच गया। सुनीता आज भी सोचती हैं कि वो एक छोटा सा मजाक उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत मोड़ बन गया।
पिता की नाराजगी और शादी का फैसला: प्यार की जीत-सुनीता ने बताया कि उनके पिता को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। उस दौर में गोविंदा एक उभरते हुए सितारे थे और लोगों का मानना था कि अगर फैंस को उनकी शादी के बारे में पता चला तो उनकी लोकप्रियता पर असर पड़ेगा। लेकिन सुनीता का अपने प्यार और गोविंदा की मेहनत पर पूरा भरोसा था। उन्हें यकीन था कि अगर किस्मत और मेहनत साथ हो, तो कोई भी रुकावट उन्हें रोक नहीं सकती। और हुआ भी यही, शादी के बाद गोविंदा का करियर और भी ऊंचाइयों पर पहुंचा। उनकी सफलता ने साबित कर दिया कि किस्मत में जो लिखा है, वह मिलकर ही रहता है। इसी विश्वास ने उनके रिश्ते को और भी मजबूत बनाया।
सगाई के वक्त ही बन गए थे गोविंदा स्टार, सुनीता का ‘लेडी लक’ फैक्टर-सुनीता के अनुसार, जब उनकी और गोविंदा की सगाई हुई, उसी समय गोविंदा इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने लगे थे। वह बी.कॉम फाइनल ईयर में थे और फिल्म जगत में कदम रख रहे थे। लोग कहते हैं कि शादी से पहले किस्मत चमकती है, पर सुनीता मानती हैं कि असली रौनक तो शादी के बाद ही आती है। उनका मानना है कि पत्नी घर की लक्ष्मी होती है, और उनके जीवन में यह बात सच साबित हुई। उनकी सास भी यही मानती थीं कि सुनीता उनके बेटे के लिए बहुत लकी साबित होंगी। गोविंदा की सफलता में सुनीता का भी एक अहम योगदान रहा है, जिसे वो ‘लेडी लक’ कहती हैं।
सबसे बड़ा सहारा: बिना कहे एक-दूसरे को समझना-सुनीता आहूजा को अक्सर गोविंदा का ‘लेडी लक’ कहा जाता है। हालांकि गोविंदा इसे सीधे तौर पर स्वीकार नहीं करते, लेकिन वह जानते हैं कि उनकी पत्नी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। इतने सालों के साथ ने उन्हें इतना करीब ला दिया है कि अब उन्हें एक-दूसरे की जरूरतों को बताने की जरूरत नहीं पड़ती। सुनीता कहती हैं कि वह गोविंदा की हर बात, हर जरूरत को बिना कहे समझ जाती हैं। उनका मानना है कि दुनिया में कोई भी उन्हें गोविंदा से ज्यादा प्यार नहीं कर सकता। यही अटूट प्यार और समझ उनके रिश्ते को आज भी मजबूत बनाए हुए है।
सेट पर लंच का सफर: प्यार का खाना-सुनीता को याद है कि गोविंदा को खाने का कितना शौक है। वह अक्सर उनके लिए शूटिंग पर लंच लेकर जाती थीं। दाल, भिंडी, पालक पनीर, पाया सूप और चिकन उनके पसंदीदा व्यंजन थे। गोविंदा की दिन में कई-कई शिफ्ट होती थीं, इसलिए उनसे मिलने का मौका सिर्फ लंच ब्रेक में ही मिलता था। सुनीता का मानना है कि किसी का दिल जीतने का सबसे आसान रास्ता उसके पेट से होकर जाता है। इसीलिए वह हमेशा अपने हाथों से उनके लिए खाना बनाती थीं और उनका ख्याल रखती थीं। वह मजाक में कहती हैं कि उन्हें गोविंदा को मुझसे अच्छी और देसी बीवी कहां मिलेगी!
अगले जन्म में पति नहीं, पर सहारा जरूर!-हाल ही में एक इंटरव्यू में जब सुनीता से पूछा गया कि वह अक्सर क्यों कहती हैं कि गोविंदा पति से ज्यादा अच्छे बेटे हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने खुद गोविंदा से कहा है कि अगले जन्म में वह उनके पति न बनें। इसके पीछे की वजह यह है कि गोविंदा अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि वे सुनीता को ज्यादा समय नहीं दे पाते थे। सुनीता चाहती थीं कि उनका पति उन्हें डिनर पर ले जाए, मूवी दिखाए, या यूं ही सड़क पर पानीपुरी खिलाए, लेकिन गोविंदा अपने काम के प्रति इतने समर्पित थे कि यह सब कर पाना उनके लिए मुश्किल था। फिर भी, सुनीता मानती हैं कि उनका रिश्ता एक-दूसरे की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा है और वे हमेशा साथ हैं।



