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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: सऊदी एयरबेस पर हमला और खर्ग आइलैंड पर अमेरिकी बमबारी

मिडिल ईस्ट का हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अब यह क्षेत्र खुले सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है। हाल ही में सऊदी अरब के एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे पर ईरान के हमले में अमेरिकी वायुसेना के कई रिफ्यूलिंग विमान क्षतिग्रस्त हो गए। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर भारी बमबारी की है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला-सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए इस हमले में अमेरिकी वायुसेना के पांच रिफ्यूलिंग विमान नुकसान में आए। ये विमान जमीन पर खड़े थे और हमले में इन्हें आंशिक क्षति हुई। यह एयर बेस मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए बेहद अहम माना जाता है। फिलहाल इन विमानों की मरम्मत की जा रही है ताकि वे जल्द ही ऑपरेशन में वापसी कर सकें।

ट्रंप का दावा: खर्ग आइलैंड पर जबरदस्त बमबारी-अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर भारी बमबारी की है। उन्होंने इसे मिडिल ईस्ट के इतिहास की सबसे ताकतवर सैन्य कार्रवाई बताया। ट्रंप ने कहा कि बमबारी में कई सैन्य ठिकाने नष्ट हुए, लेकिन तेल के ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया।

खर्ग आइलैंड की रणनीतिक अहमियत-खर्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का एक महत्वपूर्ण द्वीप है, जो देश के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। यहां से ईरान का लगभग 80-90 प्रतिशत कच्चा तेल दुनिया के विभिन्न देशों में भेजा जाता है। इस द्वीप पर बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन और तेल भरने की सुविधाएं मौजूद हैं, जो इसे ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का दिल बनाती हैं।

खर्ग आइलैंड का भौगोलिक महत्व-यह छोटा सा द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से करीब 24 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। आकार में छोटा होने के बावजूद इसका महत्व बहुत बड़ा है क्योंकि यह देश के तेल निर्यात और ऊर्जा व्यापार का मुख्य केंद्र है। इसके कारण यह क्षेत्र वैश्विक तेल बाजार के लिए भी बेहद अहम माना जाता है।

तेल लोडिंग की विशाल क्षमता-अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, खर्ग आइलैंड से रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तेल जहाजों में लोड किया जा सकता है। यह क्षमता इसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान देती है। तेल निर्यात के लिहाज से यह द्वीप ईरान की आर्थिक मजबूती का आधार है।

युद्ध के शुरुआती दिनों में सुरक्षित रहा द्वीप-ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के शुरुआती दो हफ्तों में खर्ग आइलैंड को सैन्य हमलों से बचाया गया था। इस वजह से इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा था, लेकिन बाद में यह ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक सूची में शामिल हो गया।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति में खर्ग आइलैंड-जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ा, खर्ग आइलैंड पर नजरें टिक गईं। इसे निशाना बनाकर ईरान के तेल निर्यात और आर्थिक व्यवस्था को कमजोर किया जा सकता है। इसलिए यह द्वीप अमेरिकी रणनीति में खास महत्व रखता है।

इराक में KC-135 विमान हादसा, छह सैनिकों की मौत-इसी बीच पश्चिमी इराक में अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें छह क्रू मेंबर की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब दो विमान एक मिशन के दौरान ऑपरेशन को सपोर्ट कर रहे थे। हादसे के बाद दूसरा विमान सुरक्षित इजरायल में उतर गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की कड़ी चेतावनी-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा डालेगा, तो अमेरिका खर्ग आइलैंड के तेल ढांचे को भी निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है और ईरान उसके सामने टिक नहीं पाएगा।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती संवेदनशीलता-मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव के बढ़ने से रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है। अगर टकराव जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए सतर्कता जरूरी हो गई है।

इस तरह, मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और आने वाले समय में इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रयासों की जरूरत होगी।

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