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7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी तेल: दो सुपरटैंकरों की एंट्री से बदलेगा ऑयल गेम?

सात साल बाद भारत में ईरानी तेल की वापसी: गुजरात और ओडिशा के तट पर बड़े जहाज, अमेरिका की छूट के बीच सप्लाई फिर से शुरू-भारत में करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरानी कच्चे तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो गई है। गुजरात के सिक्का और ओडिशा के पारादीप तट पर दो बड़े सुपरटैंकर पहुंचे हैं, जो इस क्षेत्र में ऊर्जा बाजार में नई हलचल ला रहे हैं। यह सप्लाई अमेरिका द्वारा हाल ही में दी गई छूट के बाद हुई है, जो वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने की कोशिश का हिस्सा है। आइए विस्तार से जानते हैं इस खबर के हर पहलू को।

ईरानी तेल की वापसी: सात साल बाद भारत में फिर से सप्लाई शुरू-करीब सात साल बाद भारत ने फिर से ईरान से कच्चा तेल आयात करना शुरू किया है। 2019 के बाद से यह आयात पूरी तरह बंद था, लेकिन अब दो बड़े सुपरटैंकर गुजरात और ओडिशा के तट पर पहुंच चुके हैं। यह कदम न सिर्फ भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में भी इसकी अहमियत है। अमेरिका की हालिया छूट ने इस सप्लाई का रास्ता साफ किया है।

गुजरात के सिक्का तट पर ‘Felicity’ टैंकर की एंट्री-‘Felicity’ नाम का एक बड़ा क्रूड कैरियर, जो नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी द्वारा संचालित है, गुजरात के सिक्का तट पर पहुंचा है। इस टैंकर में लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लोड किया गया था। सिक्का तट भारत के प्रमुख तेल हैंडलिंग हब में से एक है, जहां बड़ी तेल कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इस टैंकर के आने से यहां तेल उद्योग में हलचल बढ़ गई है।

ओडिशा के पारादीप में दूसरा टैंकर ‘Jaya’ पहुंचा-साथ ही, ‘Jaya’ नाम का दूसरा टैंकर ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर पहुंचा है। इसमें भी करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जो फरवरी के अंत में खार्ग द्वीप से लोड हुआ था। पारादीप पोर्ट मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित होता है, जिसने इस शिपमेंट की पुष्टि की है। यह सप्लाई अमेरिका और इजराइल के बीच सैन्य तनाव शुरू होने से पहले रवाना हुई थी।

अमेरिका की छूट ने खोला रास्ता, लेकिन सख्ती भी बढ़ी-इन शिपमेंट्स के पीछे अमेरिका द्वारा दी गई एक महीने की छूट का बड़ा हाथ है, जिसमें पहले से समुद्र में मौजूद ईरानी तेल को बेचने की अनुमति दी गई थी। इसका मकसद वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित करना था। हालांकि, शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर फिर से कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे भविष्य में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

खरीदारों का रहस्य: कौन हैं ये कंपनियां?-भारत में आए इन टैंकरों के खरीदारों का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं हुआ है। हालांकि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने पारादीप पोर्ट से एक शिपमेंट खरीदने की पुष्टि की है। वहीं, गुजरात के सिक्का क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम जैसी बड़ी कंपनियों का मजबूत नेटवर्क है, जो इस तरह के आयात को संभालती हैं। माना जा रहा है कि इन कंपनियों ने इस मौके का फायदा उठाया है।

भारत का ईरानी तेल पर पुराना भरोसा-पहले भारत ईरानी तेल का बड़ा आयातक था। खासतौर पर ईरान के लाइट और हेवी क्रूड तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त माने जाते थे। 2018 में भारत रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल तेल ईरान से खरीदता था। लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह आयात बंद हो गया था। उस समय ईरानी तेल भारत के कुल तेल आयात का लगभग 11.5 प्रतिशत था।

चीन की ओर मुड़ा एक टैंकर, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां-हाल ही में ‘Ping Shun’ नाम का एक टैंकर, जिसमें करीब 6 लाख बैरल ईरानी तेल था, गुजरात के वडिनार की ओर आ रहा था, लेकिन भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण बीच रास्ते से चीन की ओर मुड़ गया। यह दर्शाता है कि इस तरह के सौदों में आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां बनी रहती हैं, जो सप्लाई चेन को प्रभावित करती हैं।

आगे का रास्ता और बाजार पर असर-अभी यह छूट 19 अप्रैल तक ही मान्य है, उसके बाद स्थिति फिर बदल सकती है। समुद्र में लगभग 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जिसमें से करीब 5.1 करोड़ बैरल भारत के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों के लिए बेहतर विकल्प है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस मौके का कितना फायदा उठा पाता है।

पुरानी साझेदारी की नई शुरुआत?-सात साल बाद ईरानी तेल की वापसी ने भारत के ऊर्जा बाजार में नई उम्मीदें जगाई हैं। हालांकि यह वापसी फिलहाल अस्थायी है, लेकिन यह संकेत देता है कि सही परिस्थितियों में भारत-ईरान के बीच पुरानी साझेदारी फिर से मजबूत हो सकती है। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक हालात के आधार पर आने वाले समय में इस क्षेत्र में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

इस तरह, ईरानी तेल की वापसी न केवल भारत के ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और तेल बाजार की जटिलताओं को भी दर्शाता है। आने वाले समय में इस पर नजर रखना जरूरी होगा कि भारत इस अवसर का किस हद तक लाभ उठा पाता है।

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