दंतेवाड़ा के जंगलों में बड़ी मुठभेड़: 5 लाख का इनामी माओवादी राजेश पुनेम ढेर, हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर पुलिस-माओवादियों की मुठभेड़: एक माओवादी ढेर, बड़ा हथियार बरामद-छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर की सीमा से लगे घने जंगलों में पुलिस और माओवादियों के बीच हुई जबरदस्त मुठभेड़ ने इलाके में सुरक्षा बलों की ताकत का परिचय दिया है। इस मुठभेड़ में भैरमगढ़ एरिया कमेटी के एसीएम राजेश पुनेम मारा गया, जो लंबे समय से पुलिस की नजर में था। आइए विस्तार से जानते हैं इस ऑपरेशन की पूरी कहानी।
गुप्त सूचना पर शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन-पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि थाना गीदम क्षेत्र के ग्राम गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के बीच जंगलों में नक्सलियों ने हथियारों का बड़ा डंप छिपा रखा है। इस सूचना के आधार पर दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार उयके के नेतृत्व में डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की टीम ने पूरी तैयारी के साथ इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
माओवादियों ने घात लगाकर पुलिस पर किया हमला-सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे पुलिस डंप की तलाश में आगे बढ़ी और जंगलों में घेराबंदी शुरू की। रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच भैरमगढ़ एरिया कमेटी के 8 से 10 माओवादियों ने अचानक पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। उनका मकसद पुलिस के हथियार लूटना था, लेकिन पुलिस ने पूरी सतर्कता से जवाबी कार्रवाई की।
पुलिस ने संयम से दिया जवाब, माओवादी भागने को मजबूर-माओवादियों की फायरिंग के बाद पुलिस ने तुरंत सुरक्षित मोर्चा संभाला और आत्मसमर्पण की चेतावनी दी। जब गोलियां बंद नहीं हुईं, तो जवानों ने संयम और सटीकता से जवाबी फायरिंग की। पुलिस की प्रभावी कार्रवाई से माओवादी कमजोर पड़ गए और अंधेरे व जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले।
मुठभेड़ में मारा गया माओवादी, भारी हथियार बरामद-मुठभेड़ के बाद इलाके की तलाशी ली गई, जहां एक माओवादी का शव मिला। साथ ही बड़ी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री जब्त की गई। बरामद सामान में एसएलआर और इंसास रायफल, पिस्टल, मैगजीन, जिंदा कारतूस, मिसफायर राउंड, वॉकी-टॉकी सेट और अन्य सामग्री शामिल हैं, जो नक्सलियों की ताकत को दर्शाते हैं।
आत्मसमर्पित कैडर की मदद से हुई माओवादी की पहचान-मारे गए माओवादी की पहचान आत्मसमर्पित नक्सली कैडर की मदद से राजेश पुनेम के रूप में हुई। वह भैरमगढ़ एरिया कमेटी का एसीएम था और बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के ग्राम बुरजी का रहने वाला था। सुरक्षा बलों ने संभावित आईईडी और एंबुश के खतरे को ध्यान में रखते हुए पूरी सतर्कता से आगे की कार्रवाई की।
बिना किसी नुकसान के सफल रहा ऑपरेशन-सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की डोमिनेशन प्रक्रिया पूरी की और सुरक्षित तरीके से दंतेवाड़ा लौटे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह ऑपरेशन बिना किसी सुरक्षाबल को नुकसान पहुंचाए सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इसे नक्सल गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी जीत माना जा रहा है, जो इलाके की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर हुई इस मुठभेड़ ने नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की तत्परता और ताकत को साबित किया है। गुप्त सूचना पर चलाए गए इस ऑपरेशन में एक खतरनाक माओवादी का सफाया और भारी हथियार बरामद होना इलाके में शांति और सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। यह सफलता भविष्य में नक्सलियों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की उम्मीद जगाती है।



