मोदी सरकार ने थरूर को विदेश भेजा, कांग्रेस रह गई हैरान: जानिए पूरी अंदरूनी कहानी

शशि थरूर: विदेश नीति में नया मोड़!- भारत सरकार ने हाल ही में एक ऐसा फैसला लिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पाकिस्तान से फैले आतंकवाद पर दुनिया को भारत का पक्ष रखने के लिए बनाए गए सात प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व कांग्रेस सांसद शशि थरूर को सौंपा गया है। यह फैसला इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि कांग्रेस ने खुद थरूर का नाम इस प्रतिनिधिमंडल के लिए नहीं सुझाया था।
थरूर की नियुक्ति: एक नया अध्याय- शनिवार को संसदीय कार्य मंत्रालय ने जब प्रतिनिधिमंडलों के नामों की घोषणा की, तो शशि थरूर का नाम सबसे ऊपर था। थरूर ने खुद सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी दी और देशहित में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने बताया कि उन्हें पांच महत्वपूर्ण देशों की यात्रा पर भारत का पक्ष रखने का मौका मिला है। इस नियुक्ति से साफ है कि सरकार विदेश नीति में नए प्रयोग करने को तैयार है।
कांग्रेस का रुख: असमंजस और असंतोष- कांग्रेस ने सरकार को चार अलग-अलग नेताओं के नाम सुझाए थे, लेकिन थरूर का नाम उस सूची में नहीं था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस बात की जानकारी दी। हालांकि, थरूर की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष भी है। कुछ नेताओं का मानना है कि थरूर ने पार्टी की ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर दी है, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और युद्धविराम को लेकर उनके बयानों के कारण। यह स्थिति कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है।
राजनीतिक समीकरण: जटिलता और संभावनाएँ- थरूर की नियुक्ति विपक्ष और सरकार के बीच जटिल राजनीतिक समीकरण को दर्शाती है। सरकार विपक्ष के कुछ नेताओं को साथ लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बात रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस अपनी एकता बनाए रखने की कोशिश में है। थरूर जैसे नेता, जो अपनी अलग राय रखने से नहीं हिचकिचाते, इस स्थिति में एक चुनौती और एक माध्यम दोनों ही हैं। यह घटनाक्रम भविष्य में दोनों पक्षों के रिश्तों को कैसे प्रभावित करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।



