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Politics

नाम एक, मुकाबला चार से! पेरंबूर में विजय के सामने ‘हमनाम’ उम्मीदवार, अब EVM में फोटो से खत्म होगी कन्फ्यूजन

पेरंबूर विधानसभा चुनाव में ‘नाम का खेल’: कैसे चुनाव आयोग और पार्टी कर रहे हैं वोटर्स की मदद
पेरंबूर सीट पर नामों का जाल, वोटर्स के लिए चुनौती-तमिलनाडु की पेरंबूर विधानसभा सीट पर इस बार एक दिलचस्प और थोड़ी चौंकाने वाली स्थिति बनी है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय के खिलाफ चार ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके नाम उनसे बहुत मिलते-जुलते हैं। यह पुरानी चुनावी रणनीति है, जिसका मकसद वोटर्स को भ्रमित करना होता है ताकि वोट बंट जाएं।

चुनाव आयोग का नया फैसला: EVM में उम्मीदवार की फोटो भी दिखेगी-वोटर्स को भ्रमित होने से बचाने के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में उम्मीदवारों के नाम के साथ उनकी फोटो भी दिखाई जाएगी। इससे वोटर सही उम्मीदवार को आसानी से पहचान पाएंगे और सिर्फ नाम के आधार पर गलत वोट डालने की संभावना कम हो जाएगी।

‘व्हिसल’ चुनाव चिन्ह से TVK की बढ़ती पहचान-तमिलगा वेत्री कड़गम का चुनाव चिन्ह ‘व्हिसल’ (सीटी) राज्य में काफी लोकप्रिय हो चुका है। पार्टी ने इस चिन्ह को लेकर खास गाना भी जारी किया है, जिससे इसकी पहचान और मजबूत हुई है। नाम के साथ-साथ चुनाव चिन्ह के जरिए भी पार्टी अपने वोटर्स तक साफ संदेश पहुंचा रही है।

चारों हमनाम उम्मीदवार चेन्नई के अलग-अलग इलाकों से-जोसेफ विजय के नाम से मिलते-जुलते चारों उम्मीदवार चेन्नई के अलग-अलग इलाकों से हैं। 49 वर्षीय एम. जोसेफ कोडुंगैयूर से, 65 वर्षीय एस. जोसेफ व्यासरपाड़ी से, 29 वर्षीय के. विजय रोयापुरम से और 35 वर्षीय विजय जी भी व्यासरपाड़ी से जुड़े हैं। यह रणनीति स्थानीय स्तर पर ही तैयार की गई है।

TVK को झटका: कुछ सीटों पर नामांकन रद्द और उम्मीदवार लापता-TVK को कुछ सीटों पर झटका भी लगा है। एडप्पडी सीट पर पार्टी के उम्मीदवार और एक डमी उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया है। इसके अलावा, एक उम्मीदवार अरुण कुमार के लापता होने की खबर भी आई है। अब TVK 234 में से 233 सीटों पर ही चुनाव लड़ पाएगी।

चुनावी मुकाबला अब रणनीति और समझदारी की परीक्षा-इस बार का चुनाव सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि रणनीति और समझदारी की भी कसौटी बन गया है। जहां एक तरफ नाम के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है, वहीं चुनाव आयोग के कदम और पार्टी के प्रचार इसे संतुलित कर रहे हैं। अब देखना होगा कि वोटर्स कितने सतर्क रहते हैं और चुनाव के नतीजे किस दिशा में जाते हैं।

 

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