पवन कल्याण का विपक्ष पर बड़ा आरोप: “विदेशी एजेंडे पर काम कर रहे हैं, वोट चोरी के बहाने देश को अस्थिर करना चाहते हैं”

हार के बाद ईवीएम पर सवाल, जीतते ही खामोशी: पवन कल्याण का विपक्ष पर तीखा प्रहार!
हार पर वोट चोरी का शोर, जीत पर चुप्पी: एक विदेशी चाल?-आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जन सेना के प्रमुख, पवन कल्याण ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर काकीनाडा में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा “वोट चोरी” का नैरेटिव असल में एक विदेशी साजिश का हिस्सा है। कल्याण ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब भी विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव हारता है, तो वे ईवीएम पर सवाल उठाकर “वोट चोरी” का राग अलापते हैं, लेकिन जब वे जीत जाते हैं, तो यह मुद्दा अचानक गायब हो जाता है। उन्होंने 2024 के आंध्र चुनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एनडीए गठबंधन ने 164 सीटें जीतीं, फिर भी विपक्ष ने ईवीएम पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया।
देश की सुरक्षा पर खतरा: क्या विपक्ष खोल रहा है विदेशी ताकतों के लिए दरवाजा?-पवन कल्याण ने विपक्ष के इन आरोपों को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला बताया। उन्होंने समझाया कि दुश्मन देश अक्सर देश में आंतरिक अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं, और ऐसे में उन्हें तब आसानी होती है जब अंदर से ही कोई उनका साथ देने वाला मिल जाए। उन्होंने एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा, “किसी किले पर बाहर से हमला करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन अगर कोई अंदर से दरवाजा खोल दे, तो उस पर कब्जा करना बहुत आसान हो जाता है।” उनके अनुसार, विपक्षी नेता अनजाने में ही सही, लेकिन विदेशी ताकतों के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, और इस बात को जनता को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।
भारत की पहचान है सेक्युलरिज्म: संस्कृति में निहित, न कि बाहर से सीखा हुआ-अपने संबोधन में पवन कल्याण ने भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से लेकर हाल ही में हुए “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे मामलों तक, भारत ने हमेशा सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान किया है। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान नेताओं का उदाहरण दिया, जिन्हें देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाया गया। इसकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ऐसी स्थिति नहीं है, जहां हिंदू नेताओं को वह सम्मान मिले या धार्मिक अल्पसंख्यकों को वह अवसर प्राप्त हों। उन्होंने स्पष्ट किया, “धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) तो भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, इसे यूरोप या किसी बाहरी देश से सीखने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।”
स्थिर सरकार ही विकास की कुंजी: 15 साल का लक्ष्य और सुशासन का वादा-पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश में लंबे समय तक स्थिर सरकार की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि एनडीए गठबंधन को कम से कम 15 वर्षों तक शासन करना चाहिए ताकि “सुपर सिक्स” जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया जा सके और राज्य का चौतरफा विकास सुनिश्चित हो। उन्होंने आर्थिक प्रगति के लिए कानून-व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जब से वहां कड़े कानून-व्यवस्था लागू हुई है, तब से राज्य में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आया है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जहां कानून का शासन मजबूत होता है, वहीं निवेशक आकर्षित होते हैं।



