मध्यप्रदेश में बदले पेंशन के नियम: अब बेटे से पहले बेटी को मिलेगा परिवार पेंशन का हक

मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से लागू होंगे नए पेंशन नियम: जानिए क्या हैं बड़े बदलाव-मध्यप्रदेश सरकार पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्ताव को कैबिनेट में जल्द पेश किया जाएगा और ये नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे। इस बदलाव का मकसद पेंशन व्यवस्था को और ज्यादा न्यायसंगत और महिलाओं के लिए सहायक बनाना है।
परिवार पेंशन में बेटी को मिलेगी प्राथमिकता-नए नियमों के अनुसार परिवार पेंशन में अब बेटी को प्राथमिकता दी जाएगी, भले ही परिवार में बेटा हो। अगर बेटी उम्र में बड़ी है तो पेंशन की पहली हकदार वही होगी। यह कदम महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटी को आजीवन पेंशन-अब अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियों को जीवनभर परिवार पेंशन मिलेगी। इससे उन महिलाओं को आर्थिक मदद मिलेगी जो अपने खर्च खुद उठाने में असमर्थ हैं। यह नियम महिलाओं के लिए राहत और सुरक्षा का बड़ा जरिया बनेगा।
दिव्यांग संतान और भाई भी होंगे पेंशन के पात्र-अगर परिवार में कोई पुत्र, पुत्री या भाई पूरी तरह से दिव्यांग है और कमाने में असमर्थ है, तो उसे भी परिवार पेंशन का अधिकार मिलेगा। सरकार का उद्देश्य ऐसे आश्रितों को आर्थिक सहारा देना और उनकी जिंदगी आसान बनाना है।
नाबालिग बच्चों के लिए पहले से मौजूद प्रावधान-मौजूदा नियमों के तहत कर्मचारी को जीवनभर पेंशन मिलती है। कर्मचारी की मौत के बाद पत्नी को और दोनों पति-पत्नी के निधन पर नाबालिग बच्चों को परिवार पेंशन मिलती है। नए नियम इस व्यवस्था को और मजबूत बनाएंगे।
पुरानी और नई पेंशन व्यवस्था का संक्षिप्त परिचय- ओल्ड पेंशन स्कीम में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता है। एनपीएस में पेंशन एन्युटी के आधार पर तय होती है, जबकि यूपीएस में निश्चित पेंशन का प्रावधान है। नए संशोधन सभी पेंशन स्कीमों पर लागू होंगे और नियमों को एकसार बनाएंगे। मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए पेंशन नियम महिलाओं और दिव्यांगों के लिए खास राहत लेकर आएंगे। यह बदलाव पेंशन प्रणाली को और अधिक न्यायसंगत और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में इससे कई परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।



