तमिलनाडु में सियासी भूचाल: सांसद ससिकांत सेन्थिल का अनशन और कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान

सेन्थिल का अनशन: शिक्षा के लिए कांग्रेस की जंग, क्या तमिलनाडु कांग्रेस में मची है खलबली?
शिक्षा के हक़ के लिए डटे सेन्थिल, चौथे दिन भी जारी अनशन!-कांग्रेस सांसद ससिकांत सेन्थिल, जो तिरुवल्लुर से चुने गए हैं, उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वे मांग कर रहे हैं कि समग्र शिक्षा योजना के तहत तमिलनाडु के लिए रोकी गई 2,152 करोड़ रुपये की राशि तुरंत जारी की जाए। यह अनशन आज चौथे दिन भी जारी है, जो शिक्षा के अधिकार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पार्टी और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता उनके समर्थन में आगे आए हैं, जिससे इस आंदोलन को बल मिला है।
राहुल गांधी और पार्टी का पूरा समर्थन, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष की नाराजगी?-कांग्रेस आलाकमान, जिसमें राहुल गांधी जैसे बड़े नेता शामिल हैं, उन्होंने सेन्थिल के इस कदम की सराहना की है। राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल ने स्वयं फोन करके सेन्थिल के इरादों की तारीफ की और हर बच्चे के शिक्षा के अधिकार के लिए उनकी लड़ाई का समर्थन किया। वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार से तुरंत फंड जारी करने की अपील भी की है। हालांकि, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथागई इस पूरे मामले से नाखुश बताए जा रहे हैं। उनकी चिंता यह है कि यह आंदोलन राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ जैसे महत्वपूर्ण अभियान से ध्यान भटका सकता है।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह का पर्दाफाश, क्या है प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका?-ससिकांत सेन्थिल के इस अनशन ने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अंदर चल रही खींचतान को एक बार फिर सबके सामने ला दिया है। पार्टी के भीतर पहले से ही कुछ मतभेद चल रहे हैं, और यह अनशन उस दरार को और गहराता दिख रहा है। यह भी गौरतलब है कि सेन्थिल स्वयं भी कभी TNCC अध्यक्ष पद के दावेदार थे, लेकिन फरवरी 2024 में सेल्वपेरुंथागई को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। कई कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि सेन्थिल का यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से प्रदेश अध्यक्ष को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद अडिग सेन्थिल, अस्पताल से भी जारी रखी लड़ाई!-सेन्थिल की सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उच्च रक्तचाप की समस्या के कारण उन्हें 30 अगस्त को चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन, अपनी मांगों पर अडिग रहते हुए उन्होंने अस्पताल से ही अपना अनशन जारी रखा। राहुल गांधी ने सोमवार को दोबारा उनसे फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन कुमारमंगलम ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही ‘वोट चोरी’ का मुद्दा महत्वपूर्ण हो, लेकिन शिक्षा का मसला सीधे जनता से जुड़ा है और सेन्थिल ने इसे बिल्कुल सही समय पर उठाया है।
शिक्षा पर राजनीति क्यों? सेन्थिल की सीधी अपील!-ससिकांत सेन्थिल का मानना है कि बच्चों की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं आज सांसद हूं, यह सिर्फ शिक्षा की वजह से संभव हुआ है। किसी भी नीतिगत विवाद के कारण बच्चों के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। भाजपा सरकार को फौरन तमिलनाडु का बकाया फंड जारी करना चाहिए।” हालांकि, जब उनसे TNCC अध्यक्ष के आग्रह पर अनशन समाप्त करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया, जिससे यह सवाल बना हुआ है कि क्या वे अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़े रहेंगे।



