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राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा अब पटना मार्च पर खत्म होगी, कांग्रेस की बदली रणनीति

पटना में रैली नहीं, अब होगा ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का शानदार मार्च!

रणनीति में बड़ा बदलाव: रैली की जगह मार्च का फैसला-कांग्रेस और महागठबंधन ने अपनी पूरी योजना बदल दी है! पहले 1 सितंबर को पटना में एक ज़ोरदार रैली करने की तैयारी थी, लेकिन अब यह ‘वोटर अधिकार यात्रा’ राजधानी पटना में एक बड़े मार्च के साथ समाप्त होगी। पार्टी के नेताओं का मानना है कि एक पदयात्रा के रूप में इसका अंत लोगों में ज़्यादा जोश और उत्साह भरेगा। इसी सोच के चलते पटना में होने वाली रैली को मार्च में बदलने का फैसला लिया गया है, जिसमें बड़े नेता अलग-अलग जगहों से जनता को संबोधित करेंगे।

पदयात्रा क्यों चुनी गई? जनता से सीधा जुड़ाव ही मकसद-कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा में पहले ही कई बड़े नेता शामिल हो चुके हैं। ऐसे में, सभी नेताओं को एक बार फिर रैली के लिए एक मंच पर लाने के बजाय, पदयात्रा के साथ यात्रा का समापन करना ज़्यादा असरदार होगा। इससे आम जनता से सीधे जुड़ने और अपना संदेश उन तक पहुँचाने का बेहतर मौका मिलेगा। यह खास रणनीति इसलिए बनाई गई है ताकि लोगों को लगे कि यह आंदोलन सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके साथ सड़कों पर भी खड़ा है।

राहुल और तेजस्वी की बाइक सवारी ने बटोरी सुर्खियां-यात्रा के दौरान बुधवार को एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब राहुल गांधी और आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव एक साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर मुजफ्फरपुर की सड़कों से गुज़रे। सबसे खास बात तो यह थी कि प्रियंका गांधी वाड्रा भी अपने भाई राहुल के पीछे बैठी थीं। इस दौरान सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और हर जगह उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ। इस अंदाज़ ने यात्रा को और भी ज़्यादा चर्चा में ला दिया।

चुनाव आयोग के खिलाफ जनसंपर्क अभियान-यह पूरी यात्रा असल में चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान के विरोध में शुरू की गई है। कांग्रेस और महागठबंधन का सीधा आरोप है कि बिहार में मतदाता सूची में गड़बड़ियां की जा रही हैं और लोगों को उनके वोट देने के अधिकार से जानबूझकर दूर रखा जा रहा है। राहुल गांधी ने इस अहम मुद्दे को जनता तक पहुँचाने के लिए इस यात्रा की शुरुआत की है। महागठबंधन के सभी दल इस यात्रा में शामिल होकर इसे और भी मज़बूत बना रहे हैं।

16 दिनों का लंबा सफर, 1300 किमी से ज़्यादा की दूरी-‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत 17 अगस्त को सासाराम से हुई थी। यह यात्रा पूरे 16 दिनों तक चलेगी और 1 सितंबर को पटना पहुँचकर इसका समापन होगा। इस दौरान, यह यात्रा 1,300 किलोमीटर से भी ज़्यादा की दूरी तय करेगी। कांग्रेस का कहना है कि यह महज़ एक यात्रा नहीं, बल्कि जनता से जुड़ने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का एक बड़ा अभियान है।

किन-किन जिलों से गुज़र चुकी है यात्रा?-अब तक यह यात्रा गया, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा जैसे कई जिलों से होकर गुज़र चुकी है। हर जिले में लोगों का जोश देखने लायक रहा। लोग सड़कों पर निकलकर नेताओं का स्वागत कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि जिस तरह से जनता का समर्थन मिल रहा है, उससे यह साफ है कि इस यात्रा का असर आने वाले चुनावों तक ज़रूर दिखेगा।

आगे कहाँ-कहाँ जाएगी यात्रा?-इस यात्रा का अगला पड़ाव सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, सारण, भोजपुर और अंत में पटना होगा। कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं का मानना है कि पटना में होने वाला यह मार्च एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जब आम जनता और नेता मिलकर सरकार और चुनाव आयोग को एक कड़ा संदेश देंगे। पटना में होने वाला यह मार्च इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण साबित होगा, जो बिहार की चुनावी राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है।

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