सबरीमाला मुद्दा ठंडा, विकास पर गर्म हुई राजनीति: पथनमथिट्टा में बदला चुनावी माहौल

पथनमथिट्टा चुनाव में बदला माहौल: मुद्दों से विकास की ओर बढ़ता रुख-पथनमथिट्टा जिले में इस बार के चुनाव का माहौल पहले से काफी अलग नजर आ रहा है। जहां पहले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और गोल्ड चोरी जैसे विवादित मुद्दे छाए रहते थे, वहीं अब राजनीतिक पार्टियां खासकर बीजेपी और कांग्रेस विकास पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। इस बदलाव ने चुनावी रणनीतियों को पूरी तरह नया रूप दिया है।
सबरीमाला मुद्दा अब नहीं बना चुनावी हथियार-अचरज की बात यह है कि हिंदू बहुल इलाकों जैसे अरनमुला विधानसभा क्षेत्र में भी सबरीमाला का मुद्दा इस बार चुनावी बहस में कम सुनाई दे रहा है। बीजेपी के कुम्मनम राजशेखरन और कांग्रेस के अबिन वार्की दोनों ही इस विषय को प्रचार में प्रमुखता नहीं दे रहे। दोनों पार्टियां विकास को ही अपनी मुख्य प्राथमिकता बना रही हैं।
वीना जॉर्ज के सामने बढ़ती चुनौतियां-सीपीआई(एम) की उम्मीदवार और मौजूदा विधायक वीना जॉर्ज अपने विकास कार्यों को जनता के सामने रख रही हैं, लेकिन शहर के बीच बने फ्लाईओवर और पुल के मुद्दे उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। उद्घाटन के बाद पुल को बंद करना उनके लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है, जिससे उनकी लगातार तीसरी जीत आसान नहीं दिख रही।
पार्टी के अंदर असंतोष और स्वास्थ्य क्षेत्र की आलोचना-वीना जॉर्ज को बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ अपनी पार्टी के अंदर भी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में उठ रही आलोचनाएं भी उनकी राह में बाधा बन रही हैं। इन सब कारणों से उनकी जीत की राह पहले से ज्यादा कठिन होती नजर आ रही है।
बीजेपी और कांग्रेस की बदली रणनीति के पीछे की वजह-हाल ही में पंडालम क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी को झटका लगा था, जो भगवान अयप्पा के बचपन से जुड़ा माना जाता है। इसी वजह से बीजेपी और कांग्रेस अब सबरीमाला जैसे विवादित मुद्दों को तूल नहीं दे रही हैं और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं ताकि जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों पर रहे।
विकास पर जोर, जनता की बदलती सोच-बीजेपी के कुम्मनम राजशेखरन अपने कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री मोदी के विकास विजन को लेकर वोट मांगने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, बीजेपी के सहयोगी दल ट्वेंटी20 पार्टी के थॉमस के सैमुअल ने भी शुरुआत में कहा था कि सबरीमाला मुद्दा बड़ा नहीं रहेगा, लेकिन बाद में अपने बयान से पीछे हटना पड़ा। जनता अब ऐसे मुद्दों पर ध्यान दे रही है जो उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हैं।
जनता के लिए असली मुद्दे क्या हैं?-स्थानीय लोग मानते हैं कि अब सबरीमाला मुद्दा पुराना हो चुका है और इससे राजनीतिक फायदा उठाना मुश्किल है। कुम्बाझा के विनोद कुमार कहते हैं कि जब तक कोई बड़ा घटनाक्रम नहीं होता, यह मुद्दा चुनाव में पीछे ही रहेगा। जनता अब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को ज्यादा महत्व दे रही है।
चुनावी समीकरण और वोट बैंक की जंग-पथनमथिट्टा में बीजेपी के लिए जीत पाना आसान नहीं है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में ईसाई मतदाता हैं, जिनमें से कई विदेश में भी रहते हैं, जिससे वोटिंग पर असर पड़ता है। वहीं, कांग्रेस के युवा नेता अबिन वार्की इस वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं और एंटी-इंकंबेंसी का फायदा उठा सकते हैं। इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि वोट बैंक की लड़ाई और राजनीतिक समीकरण काफी जटिल हो गए हैं।
इस बार पथनमथिट्टा का चुनाव सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि विकास और जनता की बदलती सोच की लड़ाई बनकर उभरा है। राजनीतिक दलों की रणनीतियों में बदलाव और जनता के मुद्दों की प्राथमिकता इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना रही है।



