Chhattisgarh

कोरबा में कोयला खदान में दर्दनाक हादसा, 170 फीट गहरी खाई में गिरने से व्यक्ति की मौत

मानिकपुर कोयला खदान में बड़ा हादसा: चोरी के चक्कर में युवक की मौत-छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की मानिकपुर कोयला खदान में बुधवार सुबह एक गंभीर हादसा हुआ। चोरी के इरादे से खदान के प्रतिबंधित इलाके में घुसे एक व्यक्ति का पैर फिसल गया और वह करीब 170 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे ने खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोयला चोरी के दौरान युवक का पैर फिसला, मौत हो गई-मृतक की पहचान ग्राम कुदारी के भगत कुमार मरावी (42 वर्ष) के रूप में हुई है। वह दोपहर कोयला चोरी करने के लिए खदान में गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गहराई में उतरते समय उसका पैर फिसल गया और वह नीचे गिर गया। गिरने के तुरंत बाद उसकी मौत हो गई, जिससे इलाके में शोक का माहौल बन गया।

कोयला चोरी की समस्या बनी खदान के आसपास चिंता का विषय-मानिकपुर खदान और आसपास के गांवों में कोयला चोरी की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। चोरी किया गया कोयला स्थानीय ढाबों, होटलों और बस्तियों में सस्ते दामों पर बेचा जाता है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

SECL की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल-इस हादसे के बाद SECL की सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी आलोचना हो रही है। बाउंड्री वॉल और सुरक्षा गार्ड होने के बावजूद लोग प्रतिबंधित क्षेत्र में कैसे घुस जाते हैं, यह बड़ा सवाल है। अगर सुरक्षा कड़ी होती तो शायद यह जानलेवा हादसा टल सकता था। अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।

सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत किया मौके पर पहुंचकर कार्रवाई-हादसे की खबर मिलते ही मानिकपुर चौकी पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक का शव बाहर निकाला और मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

जांच के बाद होगी आगे की वैधानिक कार्रवाई-कोरबा के सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में व्यक्ति कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।

 

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