ट्रंप का दावा – मैंने भारत-पाकिस्तान को परमाणु युद्ध से बचाया, टैरिफ की धमकी देकर कराया सीजफायर

ट्रंप का सनसनीखेज दावा: क्या उन्होंने भारत-पाकिस्तान को युद्ध से रोका?
व्हाइट हाउस में गूंजा ट्रंप का ऐलान-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को एक बड़े युद्ध से बचा लिया था। व्हाइट हाउस में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, ट्रंप ने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम (सीजफायर) नहीं माना होता, तो वे दोनों देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा देते और किसी भी तरह के व्यापारिक समझौते को पूरी तरह से बंद कर देते। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले में सीधे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की थी, और उनके अनुसार दोनों देशों के बीच दुश्मनी काफी गहरी थी।
मोदी से सीधी बातचीत और व्यापारिक चेतावनी-डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दावे को पुष्ट करते हुए कहा कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी बातचीत हुई थी। इस बातचीत में उन्होंने मोदी से पूछा कि भारत और पाकिस्तान के बीच आखिर क्या चल रहा है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने मोदी को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि अगर सीमा पर तनाव कम नहीं हुआ, तो वे किसी भी व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और ऐसे ऊंचे टैरिफ लगा देंगे कि भारत की मुश्किलें बहुत बढ़ जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात नियंत्रण में नहीं आए तो भारत के साथ कोई भी व्यापारिक संबंध नहीं रखा जाएगा।
पांच घंटे में कैसे बदला माहौल?-ट्रंप का दावा है कि उनकी इस कड़ी चेतावनी के महज़ पांच घंटे के भीतर ही हालात पूरी तरह से बदल गए थे। उनके अनुसार, दोनों देशों ने युद्धविराम का पालन किया और एक बड़े संघर्ष को टाल दिया गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में यह तनाव फिर से बढ़ता है, तो वे उसे रोकने के लिए फिर से हस्तक्षेप करेंगे। इस दावे के साथ उन्होंने यह भी कहा कि उस समय सात या उससे अधिक लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया था, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे।
टैरिफ और व्यापार का दांव-ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने दुनिया भर में सात बड़े युद्धों को रोकने में भूमिका निभाई, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच का विवाद भी शामिल था। उनका कहना है कि इन सात में से चार मामलों में, उन्होंने टैरिफ और व्यापारिक दबाव का इस्तेमाल करके देशों को बातचीत की मेज पर लाने में सफलता पाई। भारत के मामले में भी उन्होंने इसी रणनीति को अपनाया। यह बयान ऐसे समय आया जब भारत से आयात होने वाले सामानों पर 50% तक के नए टैरिफ लागू होने की बात चल रही थी।
भारत का रुख: द्विपक्षीय मामले पर जोर-हालांकि, भारत ने डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का खंडन किया है। भारत का हमेशा से यह रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ युद्धविराम का फैसला दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद लिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं संसद में यह स्पष्ट किया था कि किसी भी विदेशी नेता ने भारत से किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए नहीं कहा था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी यह साफ किया था कि इस समझौते में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। भारत का कहना है कि यह पूरा मामला पूरी तरह से द्विपक्षीय बातचीत का परिणाम था।



