क्या वाकई ज़रूरी था विदेशी दौरों पर जाना? संजय राऊत का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

संजय राऊत का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: क्या है पूरा मामला?-यह लेख शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राऊत द्वारा केंद्र सरकार के ‘ऑल पार्टी डेलीगेशन’ को विदेश भेजने पर उठाए गए सवालों पर केंद्रित है। राऊत ने इस कदम को सरकार की गलतियों को छिपाने का प्रयास बताया है।
विदेश दौरे का असली मकसद?-राऊत का कहना है कि विदेशों में पहले से ही भारत के राजदूत मौजूद हैं जो देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। फिर इस महंगे डेलीगेशन की ज़रूरत क्या है? क्या यह सरकार की छवि सुधारने का एक नाटक मात्र है?
INDIA गठबंधन को राऊत की सलाह-उन्होंने INDIA गठबंधन से अपील की है कि वह सरकार के इस ‘जाल’ में न फंसे। राऊत का मानना है कि सरकार विपक्षी नेताओं को अपनी नीतियों का बचाव करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है।
डेलीगेशन का नेतृत्व और पार्टीगत असंतुलन-राऊत ने डेलीगेशन के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने शिवसेना (UBT), TMC और RJD जैसे दलों को नज़रअंदाज़ किए जाने पर नाराज़गी ज़ाहिर की है।
डेलीगेशन के सदस्य और यात्रा कार्यक्रम-इस डेलीगेशन में 51 नेता शामिल हैं, जिनमें 31 NDA और 20 गैर-NDA सदस्य हैं। सात टीमें 32 देशों और ब्रुसेल्स का दौरा करेंगी।
संसद में चर्चा की मांग-राऊत ने विपक्ष की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम हमले पर संसद में चर्चा की मांग का भी ज़िक्र किया। उनका मानना है कि डेलीगेशन की टाइमिंग संदिग्ध है।
ट्रम्प का बयान और भारत-पाकिस्तान समझौता?-राऊत ने डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने में अपनी भूमिका का दावा किया था। राऊत ने पूछा कि क्या कोई गुप्त समझौता हुआ था जिसके बारे में जनता को नहीं बताया गया?
सरकार की सफाई और सच्चाई का सवाल-सरकार ने DGMOs के बीच सहमति का दावा किया है, लेकिन राऊत का कहना है कि ट्रम्प के बयान से यह दावा संदिग्ध लगता है। सच्चाई क्या है, यह जानना ज़रूरी है।
राऊत का आरोप: जनता को गुमराह करने की कोशिश-संक्षेप में, संजय राऊत का मानना है कि सरकार जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है और विपक्ष को सावधान रहने की ज़रूरत है।



