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अमेरिका-चीन की नई बातचीत: क्या बदलेगा व्यापार और कूटनीति का माहौल?

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर बातचीत फिर से तेज हो गई है। रविवार को पेरिस में दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने मिले और कई अहम विषयों पर चर्चा की। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन यात्रा की तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है, जो आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकती है।

पेरिस में अमेरिका-चीन प्रतिनिधियों की अहम मुलाकात-रविवार को पेरिस में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग की अगुवाई में आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत शुरू हुई। दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। यह बैठक कूटनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ट्रंप की चीन यात्रा से पहले बढ़ा कूटनीतिक दबाव-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित चीन यात्रा को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच बीजिंग का दौरा कर सकते हैं, जहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। हालांकि चीन ने अभी इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है।

व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर गहरी चर्चा-चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में दोनों देश उन आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बात करेंगे जो दोनों के लिए अहम हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि बातचीत का मकसद ऐसे नतीजे निकालना है जिससे अमेरिका के किसान, कामगार और व्यापारी लाभान्वित हों। इसलिए फोकस व्यापार संतुलन और आर्थिक सहयोग पर रहेगा।

व्यापार युद्ध की छाया अभी भी बनी हुई है–हालांकि बातचीत हो रही है, लेकिन अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पिछले साल अमेरिकी प्रशासन ने 16 देशों के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसमें चीन भी शामिल है। यह जांच सुप्रीम कोर्ट के वैश्विक टैरिफ रद्द करने के फैसले के बाद शुरू हुई थी, जिससे व्यापार विवाद बढ़ा।

जबरन मजदूरी से बने सामानों पर भी जांच-व्यापार विवाद के अलावा अमेरिका ने उन उत्पादों की भी जांच शुरू की है जिनके कथित तौर पर जबरन मजदूरी से बने होने का आरोप है। चीन समेत कई देशों को इस जांच में शामिल किया गया है। चीन ने इस कदम की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

ईरान युद्ध और तेल सप्लाई पर भी हो सकती है चर्चा-माना जा रहा है कि वार्ताओं में ईरान से जुड़े हालात और तेल की वैश्विक सप्लाई पर भी बात हो सकती है। हाल के दिनों में तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी है। ट्रंप ने कई देशों को मिलकर Strait of Hormuz को सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजने की बात कही है।

शी-ट्रंप शिखर बैठक से पहले महत्वपूर्ण बैठक-विशेषज्ञों के अनुसार, पेरिस में हो रही यह बैठक शी-ट्रंप शिखर सम्मेलन से पहले सबसे अहम द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है। फ्रांसीसी बैंक Natixis के वरिष्ठ अर्थशास्त्री गैरी एनजी का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश उन मुद्दों पर सहमति बना पाएंगे जिन पर पहले से सहमति है और मतभेदों को संभाल पाएंगे।

पिछले साल से कई शहरों में हो चुकी हैं वार्ताएं-पिछले एक साल में अमेरिका और चीन के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। ये वार्ताएं जिनेवा, लंदन, स्टॉकहोम, मैड्रिड और कुआलालंपुर जैसे शहरों में हुई हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में कहा था कि यह साल अमेरिका-चीन संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा और उच्च स्तर की बैठकों का एजेंडा पहले ही तय हो चुका है।

इस तरह, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर चल रही ये बातचीत दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों के लिए अहम साबित हो सकती हैं। निवेशक, व्यापारी और राजनीतिक विशेषज्ञ इस प्रक्रिया को बड़ी उम्मीदों के साथ देख रहे हैं।

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