सीजफायर के कुछ घंटों में ही तनाव चरम पर: ईरान ने होर्मुज बंद किया, अब दुनिया की नजर अमेरिका पर

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव-8 अप्रैल की सुबह करीब 4 बजे (भारतीय समय) अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 14 दिन के युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन यह शांति ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। कुछ ही घंटों में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ गया है।
ईरान का सख्त रुख: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद-ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, जैसे ही लेबनान पर इजरायल के हमलों की खबर आई, तेहरान ने तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। ईरान इसे युद्धविराम का उल्लंघन मान रहा है। IRGC के कमांडर जनरल सैयद माजिद मूसावी ने साफ कहा कि लेबनान पर हमला ईरान पर हमला है और इसका जवाब दिया जाएगा।
वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर-होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इसके बंद होने से लगभग 20% वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होती है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचा दी है और कई देशों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन में बाधा आ सकती है।
अमेरिका का कड़ा रिएक्शन-ईरान के इस कदम पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि होर्मुज को बंद करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और ईरान को इसे तुरंत खोलना चाहिए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाते हैं।
ईरान का संदेश: अमेरिका को अब फैसला करना होगा-ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि युद्धविराम की शर्तें साफ हैं। अब अमेरिका को तय करना होगा कि वह शांति चाहता है या इजरायल के जरिए युद्ध जारी रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया लेबनान में हो रही घटनाओं को देख रही है और आगे की जिम्मेदारी अमेरिका पर है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश-इस बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बैठक बुलाने की बात कही और उम्मीद जताई कि इससे स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा। हालांकि, उन्होंने कुछ जगहों पर युद्धविराम उल्लंघन की बात भी स्वीकार की और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
युद्धविराम सिर्फ कागजों तक सीमित?-हालात को देखकर लगता है कि 14 दिन का युद्धविराम फिलहाल सिर्फ कागजों तक सीमित है। ईरान का होर्मुज बंद करना और अमेरिका को चुनौती देना इस बात का संकेत है कि स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। आने वाले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी दौरान तय होगा कि क्या शांति कायम रहती है या मध्य पूर्व फिर से बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।
यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकती है। सभी देशों की नजरें अब इस तनावपूर्ण दौर पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में मध्य पूर्व की दिशा तय करेगा।



