
शुक्रवार को कहा कि भारत के इतिहास को दबाया गया। पहले जानबूझकर विदेशी एजेंडा बढ़ाने का काम किया गया। भारत का इतिहास, सिर्फ गुलामी का इतिहास नहीं है। यह योद्धाओं का इतिहास है। अत्याचारियों के विरुद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने का इतिहास है।वही इतिहास पढ़ाया जाता रहा, जो गुलामी के कालखंड में साजिशन रचा गया था। आजादी के बाद जरूरत थी हमें गुलाम बनाने वाले विदेशियों के एजेंडों को बदला जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देश के हर कोने में मां भारती के वीर बेटे-बेटियों ने कैसे आतताइयों का मुकाबला किया, अपना जीवन समर्पित कर दिया।
दिल्ली के विज्ञान भवन में असम के वीर सपूत लचित बरफुकान की 400वीं जयंती कार्यक्रम के समापन समारोह में बोल रहे थे।असम की धरती को प्रणाम करता हूं, जिसने लचित जैसे वीर दिए। वीर लचित ने अपने जीवन में खूब साहस और वीरता दिखाई है। असम की धरती इसकी गवाह रही है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई तलवार के जोर से हमें झुकाना चाहता है, हमारी पहचान को बदलना चाहता है
जब किसी बाहरी ताकत से अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की बात आती है तो भारत का हर युवा योद्धा होता है।सेनापति लचित का जीवन प्रेरणा देता है कि हम परिवारवाद से ऊपर उठ देश के बारे में सोचें। उन्होंने कहा था कि कोई भी रिश्ता देश से बड़ा नहीं होता। किसी बाहरी ताकत से अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की बात आती है तो भारत का हर युवा योद्धा होता है।अमित शाह ने इतिहासकारों से भारत के इतिहास को फिर से लिखने के लिए कहा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार उनकी कोशिशों का समर्थन करेगी। शाह ने कहा कि हमारे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।इतिहास को ‘फिर से लिखने’ के लिए एक प्रोजेक्ट को लॉन्च किया है। प्रोजेक्ट के तहत भारत का इतिहास फिर से लिखा जाएगा। इसका मकसद है कि पहले जो भी झूठ बताया गया है, उसे खत्म करना है



