रायपुर के 15 करोड़ के स्कूल की खस्ता हालत, बच्चों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

15 करोड़ का स्कूल बना डर का घर! हर दिन बच्चों को सताता है एक ही सवाल – क्या आज सुरक्षित लौट पाएंगे?-रायपुर के दलदल सिवनी इलाके में बने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की हालत देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। जिस स्कूल को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार माना जाता था, वह आज उनके लिए खतरे का सबब बन चुका है। हर सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं, तो पढ़ाई से पहले उनकी चिंता होती है कि क्या वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे। स्कूल का मुख्य भवन तीन साल पुराना है, जबकि अतिरिक्त कक्ष दो साल पहले बने थे, लेकिन दोनों की हालत इतनी खराब है कि वे किसी भी वक्त हादसे का कारण बन सकते हैं।
15 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी भवन की हालत बदहाल-लोक निर्माण विभाग ने 2019 में मुख्य भवन और 2023 में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया था, जिसमें कुल 15 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। बावजूद इसके, भवन की हालत तेजी से खराब हो गई है। कई कमरे ऐसे हैं जहां पढ़ाई करना भी खतरनाक माना जाता है। स्थानीय लोग और अभिभावक निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर निर्माण सही होता तो इतनी जल्दी भवन जर्जर नहीं होता। यह मामला निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
800 विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में-इस स्कूल में करीब 800 बच्चे पढ़ते हैं, जिनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन जिस माहौल में उन्हें पढ़ाई करनी चाहिए, वहां दरारें और कमजोर छतें बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई हैं। कई कक्ष इतने खराब हो चुके हैं कि बच्चे वहां बैठने से डरते हैं। शिक्षक मजबूरी में बरामदों या खुले स्थानों में पढ़ाने को मजबूर हैं। सुरक्षा के लिए कई कमरों से फर्नीचर भी बाहर निकाला गया है, फिर भी कुछ बच्चे जोखिम उठाकर खराब कमरों में पढ़ते हैं। यह स्थिति स्कूल निर्माण में हुई लापरवाही को दर्शाती है।
बच्चों की जुबानी स्कूल का दर्द-स्कूल के बच्चे बताते हैं कि पिछले सालों में भवन की हालत और खराब हो गई है। फर्श कई जगह इतना कमजोर हो चुका है कि चलने पर धंस जाता है, जिससे कई बार चोटें भी आई हैं। दीवारों में गहरी दरारें हैं और बारिश या तेज हवा में डर लगता है कि कहीं छत या दीवार गिर न जाए। बच्चे चाहते हैं कि वे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकें। उन्होंने सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए ताकि वे बिना डर के स्कूल आ सकें।
लापरवाही पर उठ रहे कई बड़े सवाल-स्कूल की खराब हालत को लेकर सवाल उठ रहे -हैं कि जब भवन खराब हो रहा था तो अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? अगर दी गई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? गर्मी की छुट्टियों में मरम्मत का मौका था, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया। अब यह भी सवाल है कि कहीं निर्माण में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश तो नहीं की जा रही। जिम्मेदार विभागों को इन सवालों का जवाब देना होगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।
स्मार्ट शिक्षा के दावे और जमीनी हकीकत-सरकारें डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम की बातें करती हैं, लेकिन कई सरकारी स्कूलों की हालत इससे उलट है। रायपुर के इस स्कूल की स्थिति इसी विरोधाभास को दिखाती है। यह मामला सिर्फ एक स्कूल भवन की समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में कमियों और जवाबदेही की कमी का भी आईना है। सबसे दुखद बात यह है कि बच्चे डर के बावजूद रोजाना स्कूल आते हैं क्योंकि वे पढ़ना चाहते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस समस्या का समाधान करता है और बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार दिलाता है।



