‘विष्वगुरु’ पर कांग्रेस का तंज: BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे मोदी?

मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की कूटनीति: कांग्रेस ने पीएम मोदी पर साधा निशाना-मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं कि जब भारत इस साल BRICS+ समिट की मेजबानी कर रहा है, तो इस मौके का पूरा फायदा क्यों नहीं उठाया जा रहा। पार्टी का आरोप है कि सरकार कूटनीतिक पहल में कमजोर पड़ रही है।
कांग्रेस का पीएम मोदी पर सीधा हमला-कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी को “खुद को विश्वगुरु बताने वाला” कहा है। पार्टी का कहना है कि इस समय भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व दिखाना चाहिए, लेकिन सरकार इस मौके को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि भारत को अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करना होगा।
जयराम रमेश ने उठाए बड़े सवाल-कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पूछा कि आखिर BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा। उनका कहना है कि इस समिट के जरिए मिडिल ईस्ट संकट पर एक मजबूत और साझा कूटनीतिक रणनीति बनाई जा सकती थी, जिससे वैश्विक स्थिरता में मदद मिलती।
फोन कॉल बनाम आमने-सामने बातचीत-जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री विदेशी नेताओं से फोन पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन आमने-सामने की बातचीत का असर अलग होता है। उनका मानना है कि समिट जैसे मंच पर ठोस फैसले और रणनीति बनाना ज्यादा प्रभावी होता है, जो इस समय बेहद जरूरी है।
BRICS+ समिट में शामिल होंगे कई बड़े देश-इस साल नई दिल्ली में होने वाले BRICS+ समिट में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका समेत कई अन्य देश शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी इस मंच का हिस्सा बन सकते हैं, जिससे यह समिट और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
ट्रंप और नेतन्याहू को लेकर कांग्रेस का आरोप-कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी शायद डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते, इसलिए इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इससे भारत की कूटनीतिक भूमिका कमजोर हो रही है।
सरकार पर ‘मोरल कायरता’ का आरोप-कांग्रेस ने पहले भी केंद्र सरकार की आलोचना की है कि अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमले की खुलकर निंदा न करना भारत की नैतिक कमजोरी को दर्शाता है। पार्टी का मानना है कि भारत को अपनी पारंपरिक विदेश नीति और मूल्यों के अनुसार स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाना चाहिए।
सीजफायर की पहल न करने पर सवाल-जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों का इस्तेमाल करके युद्धविराम की कोशिश कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनका मानना है कि यह भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व दिखाने का सुनहरा मौका था, जिसे सरकार ने गंवा दिया।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका पर कांग्रेस के सवाल और आरोप सरकार के लिए चुनौती बने हुए हैं। BRICS+ समिट जैसे बड़े मंच का सही इस्तेमाल कर भारत को वैश्विक नेतृत्व दिखाना होगा, ताकि न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता भी बनी रहे।



