धर्म की खातिर छोड़ा वतन, सिंधी समाज में आज भी कायम है जनेऊ की परंपरा

ग्वालियर: चोटी और जनेऊ को हमारे सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र और अहम प्रतीक माना जाता है। जब देश का बंटवारा हुआ था, तब सिंधी समाज के लोग इन्हीं परंपराओं को बचाने के लिए पाकिस्तान से अपना घर-बार और कारोबार छोड़कर भारत आ गए थे। आज भी सिंधी समाज में जनेऊ संस्कार को बड़े आदर और आस्था से निभाया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पूज्य सिंधु हिंदू जनरल पंचायत की पंगति सुधार कमेटी हर साल वैशाखी के मौके पर सामूहिक जनेऊ संस्कार करवाती है। इस बार यह आयोजन 13 अप्रैल को दानाओली में झूलेलाल मंदिर के पास पंचायत कार्यालय में होगा। यह सिलसिला पिछले 25 सालों से बिना रुके चला आ रहा है। हरिद्वार से लाया गया गंगाजल, वृंदावन से मंगवाई गई पोशाक कमेटी की मानें तो इस बार करीब 300 बच्चों का जनेऊ संस्कार पारंपरिक विधि-विधान के साथ कराया जाएगा। इसके लिए तैयारियां भी ज़ोर-शोर से चल रही हैं। सिंधु वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष विजय वलेचा ने बताया कि इस सामूहिक जनेऊ संस्कार की शुरुआत पंचायत के मुखिया श्रीचंद वलेचा ने 25 साल पहले की थी। तभी से यह कार्यक्रम हर साल होता आ रहा है।
जनेऊ संस्कार के लिए हरिद्वार की हर की पौड़ी से पवित्र गंगाजल मंगवाया गया है। इसके अलावा, बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण की तरह सजाने की परंपरा है, इसलिए मथुरा और वृंदावन से खास पोशाकें भी मंगवाई गई हैं। पूरे आयोजन के दौरान बैंड-बाजों के साथ यज्ञोपवीत संस्कार होगा। हर बच्चे को मिलेगा खास तोहफा जनेऊ धारण करने वाले हर बच्चे को आयोजन के दिन एक टॉवल, अंडरगारमेंट्स, वृंदावन से आई पोशाक और मिठाई का डिब्बा दिया जाएगा। चूंकि यह संस्कार सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक है, इसलिए इसमें बच्चे के परिवार, रिश्तेदारों और मेहमानों के लिए भी निशुल्क भोजन का इंतज़ाम किया जाएगा। 45 लाख रुपये की बचत होगी समाज की अगर कोई परिवार अकेले में जनेऊ संस्कार कराए तो इसमें करीब 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। लेकिन कुछ परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती, इसी वजह से सामूहिक जनेऊ संस्कार की पहल की गई थी। इस बार 300 बच्चों का एक साथ जनेऊ संस्कार होगा, जिससे समाज को करीब 45 लाख रुपये की बचत होगी और लोगों को सामान जुटाने में समय भी नहीं लगेगा। शादी से पहले क्यों ज़रूरी होता है ये संस्कार? सनातन धर्म में चोटी और जनेऊ को धर्म और परंपरा से जोड़ा गया है। इन्हीं में से एक जनेऊ संस्कार को सबसे अहम माना जाता है। यह संस्कार विवाह से पहले ज़रूरी होता है। इसलिए सिंधी समाज में शादी से पहले हर लड़के का यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाता है।



