कश्मीरी पंडितों के लिए सीट आरक्षित करना बड़ा कदम होता, अमरनाथ यात्रा को ‘मिलिट्राइज’ करने पर भी मेहबूबा मुफ्ती का हमला

कश्मीर: मेहबूबा मुफ्ती ने उठाए अहम सवाल, क्या हैं समाधान?-यह लेख मेहबूबा मुफ्ती के हालिया बयानों पर आधारित है, जिसमें उन्होंने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास, अमरनाथ यात्रा पर सुरक्षा, बिजली परियोजनाओं, गुर्जर समुदाय के साथ हो रहे अन्याय और धारा 370 जैसे अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी है। आइए, विस्तार से समझते हैं।
कश्मीरी पंडितों का सवाल: क्या है समाधान?-मेहबूबा मुफ्ती का मानना है कि कश्मीरी पंडितों के लिए दो विधानसभा सीटें आरक्षित करना, उनकी वापसी और पुनर्वास का सबसे भरोसेमंद तरीका हो सकता है। उनका तर्क है कि इससे पंडित समुदाय को अपनी आवाज़ उठाने का सीधा अधिकार मिलेगा और दोनों समुदायों के बीच विश्वास बढ़ेगा। यह कदम न सिर्फ़ पंडितों के लिए, बल्कि कश्मीर की एकता और शांति के लिए भी बेहद अहम होगा। इससे पंडित समुदाय को मुख्यधारा में शामिल होने का मौका मिलेगा और उनका सामाजिक-आर्थिक विकास भी होगा। यह कदम कश्मीर में भाईचारे को बढ़ावा देगा और भविष्य में ऐसे विस्थापन को रोकने में मदद करेगा। यह एक ऐसा कदम है जिससे सभी को फायदा होगा।
अमरनाथ यात्रा और पर्यटन स्थलों पर सख्त सुरक्षा: क्या यह सही है?-मुफ्ती ने अमरनाथ यात्रा और कश्मीर के पर्यटन स्थलों पर बढ़ती सुरक्षा पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले अमरनाथ यात्रा एक आध्यात्मिक अनुभव हुआ करता था, जहाँ स्थानीय लोग और श्रद्धालु मिलकर समय बिताते थे। लेकिन अब सख्त सुरक्षा के कारण यह अनुभव बदल गया है। उनका मानना है कि कड़े सुरक्षा उपाय पर्यटन को नुकसान पहुँचा रहे हैं और स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी असर डाल रहे हैं। मुफ्ती का सुझाव है कि सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए ऐसे उपाय किए जाएँ जो पर्यटन और स्थानीय लोगों की आजीविका को प्रभावित न करें। एक संतुलित दृष्टिकोण ही कश्मीर के पर्यटन को बचा सकता है।
बिजली परियोजनाएँ और मुफ्त बिजली: क्या स्थानीय लोगों को मिल रहा है लाभ?-मुफ्ती ने बिजली परियोजनाओं से होने वाले मुनाफे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कश्मीर में पैदा होने वाली बिजली का फायदा स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। उनका मानना है कि राज्य को इन परियोजनाओं से आर्थिक मुआवजा मिलना चाहिए और गरीबों को मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को रोज़गार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यह कदम सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगा और कश्मीर के विकास में भी योगदान देगा। सरकार को इन परियोजनाओं के समझौतों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को भी इनका लाभ मिल सके।
गुर्जर समुदाय के साथ अन्याय: क्या है सच्चाई?-हाल ही में जम्मू में पुलिस फायरिंग में एक गुर्जर युवक की मौत के बाद, मुफ्ती ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कई आदिवासी युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। उन्होंने इस घटनाक्रम को एक पैटर्न के रूप में देखा है और सरकार से कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। मुफ्ती का मानना है कि आदिवासी समुदाय के साथ हो रहे अन्याय को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है। इससे न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी।
धारा 370 और वर्तमान राजनीतिक स्थिति: क्या है मेहबूबा का नज़रिया?-मुफ्ती ने धारा 370 के निरस्तीकरण और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि जब पीडीपी भाजपा के साथ गठबंधन में थी, तब उन्होंने धारा 370 को छेड़ने नहीं दिया था। उनका मानना है कि वर्तमान सरकार राज्य के असली मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है। मुफ्ती ने कहा कि अगर सरकार राज्य के विकास और लोगों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देगी तो वह उसका स्वागत करेंगी।



