ममता बनर्जी लिखेंगी किताब: कई प्रधानमंत्रियों संग अपने अनुभव पहली बार साझा करेंगी

ममता बनर्जी की नई किताब: प्रधानमंत्रियों के साथ निजी अनुभवों का खुलासा!
कोलकाता पुस्तक मेले में होगा धमाका!-पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जल्द ही एक ऐसी किताब के साथ आ रही हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस किताब में, वह देश के कई प्रधानमंत्रियों के साथ बिताए अपने निजी पलों और अनुभवों को साझा करेंगी। ममता बनर्जी ने खुद बताया कि उन्होंने कई प्रधानमंत्रियों को बहुत करीब से देखा है और अब वह अपनी किताब के जरिए यह बताएंगी कि कौन प्रधानमंत्री असल में कैसा था। यह किताब अगले साल कोलकाता पुस्तक मेले में लॉन्च होने वाली है और अभी से ही चर्चा का विषय बनी हुई है।
चार दशक से भी लंबा राजनीतिक सफर: अनकहे किस्से-ममता बनर्जी का राजनीतिक सफ़र चार दशक से भी ज़्यादा पुराना है। इस लंबे अरसे में उन्होंने कांग्रेस, एनडीए और यूपीए, सभी के साथ काम किया है। वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं और बाद में कांग्रेस के साथ मिलकर यूपीए सरकार का भी हिस्सा बनीं। इस दौरान उन्होंने रेलवे, कोयला, महिला और बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाली। अब वह अपनी किताब में इन सभी अनुभवों को बिल्कुल बेबाक अंदाज़ में सामने लाने की तैयारी में हैं, जिससे कई अनकहे किस्से सामने आ सकते हैं।
सच का सामना: बेबाक अंदाज़ में होंगी बातें-ममता बनर्जी ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी किताब में वही सब लिखेंगी जो उन्होंने खुद देखा और महसूस किया है। उनके अनुसार, इस किताब में न तो कोई बनावटी बातें होंगी और न ही सिर्फ तारीफों के पुल बांधे जाएंगे। इसमें सीधे-सीधे उन प्रधानमंत्रियों के बारे में अनुभव होंगे कि वे असल में कैसे थे, उनके काम करने का तरीका क्या था और सत्ता के गलियारों में कैसा माहौल रहता था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन खुलासों से कई बड़े नेताओं को थोड़ी असहजता महसूस हो सकती है।
सत्ता और संघर्ष की अनसुनी कहानियां-कांग्रेस से अलग होकर 1998 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और उसके बाद कई उतार-चढ़ाव देखे। कभी वह बीजेपी की एनडीए सरकार में मंत्री बनीं, तो कभी यूपीए सरकार में शामिल हुईं। अब लंबे समय से बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर काम करते हुए उन्होंने सत्ता और संघर्ष, दोनों को बहुत करीब से जिया है। इस किताब में इन सभी अनुभवों की झलकियां मिलेंगी – कैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं और नेताओं के बीच किस तरह के टकराव होते हैं, यह सब कुछ सामने आ सकता है।
आने वाले चुनावों की रणनीति या सिर्फ संस्मरण?-राजनीतिक विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यह किताब सिर्फ एक संस्मरण बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि यह एक तरह का राजनीतिक संदेश भी देगी। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव और आने वाली राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी खुद को एक प्रमुख विपक्षी नेता के तौर पर पेश करना चाहती हैं। ऐसे में, यह किताब उनके अनुभवों के साथ-साथ उनकी रणनीतियों और सोच को भी उजागर करेगी, जो आने वाले समय में देश की राजनीति को एक नई दिशा दे सकती है।



