बिहार चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर CPI(M) की दावेदारी, महागठबंधन में बढ़त की उम्मीद

बिहार में महागठबंधन: सीट बंटवारे की गरमागरम चर्चा और जनता का बढ़ता जोश!
महागठबंधन में सीट बंटवारे की तेज होती बातचीत-जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल गरमा रहा है, वैसे-वैसे महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इस बार, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI(M)) ने पिछले चुनावों में अपने शानदार प्रदर्शन को देखते हुए अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी मंशा जाहिर की है। पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि वाम दलों का बिहार में एक मजबूत जनाधार है और 2020 के चुनावों में उनका प्रदर्शन उम्मीद से कहीं बेहतर रहा था। इसी आधार पर, वे इस बार अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालांकि, बेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी अपनी मांगों को लेकर एक व्यावहारिक और तर्कसंगत रवैया अपनाएगी, क्योंकि महागठबंधन में कई दल हैं और सभी की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि महागठबंधन एक मजबूत एकता के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा और इस बार जीत ऐतिहासिक होगी।
जनता का उत्साह: महागठबंधन की रैलियों में उमड़ी भीड़-एमए बेबी ने हाल ही में महागठबंधन द्वारा आयोजित ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान जनता के भारी उत्साह का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 9 जुलाई और 1 सितंबर को हुई रैलियों में युवाओं और महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है। यह उत्साह महागठबंधन के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है और इससे इस बार ‘प्रचंड जीत’ की उम्मीदें बढ़ गई हैं। CPI(M) का मानना है कि जनता का यह रुझान इस बात का प्रमाण है कि बिहार में महागठबंधन की पकड़ मजबूत हो रही है और सभी विपक्षी दल एकजुट होकर जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
CPI(M) की सीटों पर मजबूत दावेदारी-पिछले बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में, CPI(M) ने केवल चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से दो पर जीत हासिल की और दो पर बहुत मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार, पार्टी का कहना है कि उन चार सीटों पर तो उनका अधिकार बनता ही है, साथ ही उन्होंने कुछ अन्य सीटों की भी पहचान की है जहाँ उनकी स्थिति काफी मजबूत है। CPI(M) की राज्य समिति ने अपनी दूसरी प्राथमिकता सूची में सात सीटों को शामिल किया है, जिनमें पूर्णिया, मधुबनी की बिस्फी, खगड़िया की परबत्ता, सहरसा की महिषी, दरभंगा की बहादुरपुर, पश्चिम चंपारण की नौतुन और समस्तीपुर की मोइद्दीन नगर जैसी सीटें शामिल हैं। बेबी ने उम्मीद जताई है कि राजद नेता तेजस्वी यादव इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और सभी दलों के बीच एक संतुलित सीट बंटवारा सुनिश्चित करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर विपक्ष का पलटवार-चुनावों के इस माहौल में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बिहार में ‘घुसपैठियों’ को लेकर एक बयान दिया था। इस पर CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान प्रधानमंत्री के पद की गरिमा के खिलाफ है। बेबी ने सवाल उठाया कि जब केंद्र में भाजपा की सरकार है और बिहार में भी एनडीए सत्ता में है, तो उन्होंने अब तक इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई की है? उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान केवल ‘सस्ती राजनीति’ और ‘ध्रुवीकरण’ का एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना है। उन्होंने चिंता जताई कि अब बंगाली भाषी अल्पसंख्यकों को भी विदेशी कहा जा रहा है, जो एक बेहद खतरनाक स्थिति है और समाज को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।
2020 के चुनाव में वामदलों का शानदार प्रदर्शन-बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में वामदलों ने सभी को चौंकाते हुए उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया था। CPI(ML) लिबरेशन, CPI और CPI(M) ने मिलकर कुल 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से 16 सीटों पर जीत हासिल की थी। CPI(M) ने चार सीटों पर चुनाव लड़कर दो सीटें जीतीं, जबकि CPI ने छह सीटों में से दो पर विजय प्राप्त की। वहीं, CPI(ML) लिबरेशन ने 19 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 12 सीटों पर जीत दर्ज की। इस बेहतरीन प्रदर्शन ने वामदलों की राजनीतिक जमीन को काफी मजबूत किया है और यही कारण है कि वे इस बार अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं।
महागठबंधन में शामिल दल और भविष्य की रणनीति-वर्तमान में, महागठबंधन में छह प्रमुख दल शामिल हैं: राजद, कांग्रेस, CPI(ML) लिबरेशन, CPI, CPI(M) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP)। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के भी इस गठबंधन में शामिल होने की संभावना है। 2020 के चुनावों में महागठबंधन ने कड़ा मुकाबला पेश किया था, लेकिन वे बहुमत से थोड़ा पीछे रह गए थे। इस बार, सभी दलों का मुख्य उद्देश्य यह है कि सीट बंटवारे को लेकर जल्द से जल्द स्पष्टता आ जाए, ताकि चुनाव प्रचार को पूरी मजबूती के साथ शुरू किया जा सके। राजद नेता तेजस्वी यादव विपक्ष के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में उभर रहे हैं, और वामदलों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में एक संतुलित और मजबूत गठबंधन चुनावी मैदान में उतरेगा।
जनता का मिजाज और आने वाले चुनाव-बिहार में बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याएं लंबे समय से लोगों को परेशान कर रही हैं। यही कारण है कि चुनावी सभाओं में युवाओं और महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी जा रही है। CPI(M) का दावा है कि जनता अब बदलाव के मूड में है और इस बार महागठबंधन की सरकार बनेगी। दूसरी ओर, भाजपा और एनडीए इस बार भी कानून-व्यवस्था और विकास को अपने चुनावी मुद्दे बनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह स्पष्ट है कि आने वाले चुनाव बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकते हैं, जहाँ जनता अपने भविष्य का फैसला करेगी।



