बिहार भाजपा में बवाल: पूर्व मंत्री आर.के. सिंह ने अपने ही नेताओं पर उठाए सवाल

बिहार की राजनीति में भूचाल: भ्रष्टाचार के आरोपों से बीजेपी की बढ़ी मुश्किलें!-बिहार की राजनीति आजकल गरमाई हुई है, और वजह है भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप। जन सुराज अभियान के प्रणेता प्रशांत किशोर (पीके) ने सीधे-सीधे बिहार भाजपा के बड़े नेताओं पर उंगली उठाई है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू मंत्री अशोक चौधरी पर भ्रष्टाचार के संगीन इल्ज़ाम लगाए हैं। इन आरोपों के बाद, खुद भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह भी मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं पर लगे इन आरोपों को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं होगा और संबंधित नेताओं को तुरंत अपनी सफाई पेश करनी चाहिए। आर.के. सिंह का मानना है कि अगर आरोपी नेता चुप रहे, तो इसका सीधा असर भाजपा की छवि पर पड़ेगा। इसलिए, यह ज़रूरी है कि आरोप झेल रहे नेता सामने आएं और अपना पक्ष रखें, ताकि जनता के मन में जो भी शंकाएं हैं, वे दूर हो सकें।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर उठे गंभीर सवाल-आर.के. सिंह ने तो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर विशेष तौर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने जो आरोप लगाए हैं, उन पर सम्राट चौधरी को जवाब देना ही होगा। पीके का दावा है कि सम्राट चौधरी असल में राकेश कुमार नाम के व्यक्ति थे, जिनका नाम बाद में बदला गया और अंततः वे सम्राट चौधरी बने। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई भी पूरी नहीं की है और जेल से रिहाई पाने के लिए फर्जी आयु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था। आर.के. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि इतने गंभीर आरोपों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यदि उपमुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का खंडन नहीं करते हैं, तो इससे न केवल सरकार की, बल्कि पूरी भाजपा की साख पर गहरा असर पड़ेगा। यह स्थिति पार्टी के लिए चिंताजनक है और इससे निपटने के लिए पारदर्शी रवैया अपनाना बेहद ज़रूरी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं पर भी लगे आरोप-सिर्फ सम्राट चौधरी ही नहीं, बल्कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आर.के. सिंह ने इस बात को स्पष्ट करने की मांग की है कि किशनगंज के पास चल रहे माता गुजरी मेडिकल कॉलेज पर दिलीप जायसवाल का कब्जा कानूनी है या अवैध, जैसा कि प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया है। इसके साथ ही, जदयू मंत्री अशोक चौधरी पर भी 200 करोड़ की संपत्ति खरीदने का मामला उठाया गया है। आर.के. सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी अपील की है कि वे स्वयं आगे बढ़कर अपने मंत्रियों और सहयोगियों से इन आरोपों पर जवाब मांगें। उनका मानना है कि अगर इन मुद्दों पर चुप्पी साधी गई, तो जनता के बीच सरकार और गठबंधन की छवि को भारी नुकसान पहुंचेगा। यह समय है कि सच्चाई सामने आए और जनता का विश्वास बना रहे।
आर.के. सिंह का बेबाक रुख और स्पष्ट संदेश-आर.के. सिंह अपनी बेबाक और स्पष्टवादी छवि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे कहा, “अगर सच बोलना बगावत है, तो मान लीजिए कि मैं भी बागी हूं।” पूर्व गृहमंत्री रह चुके सिंह का यह बयान पार्टी के भीतर ही हलचल मचा रहा है। वे इससे पहले मोदी सरकार में बिजली मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें आरा सीट से हार का सामना करना पड़ा था। इन सबके बावजूद, उनकी ईमानदार और सख्त छवि बरकरार है। उनका दृढ़ विश्वास है कि जनता के सामने सवाल उठाने से ही पार्टी की साख बचाई जा सकती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने ही नेताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता को गुमराह न किया जा सके।



