भोपाल में नवरात्रि पर मांस-मछली की दुकानों पर रोक, महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल

भोपाल में ‘नो-नॉनवेज’ जोन: महुआ मोइत्रा का तीखा प्रहार, BJP पर साधा निशाना!
क्या है पूरा मामला?-भोपाल में नवरात्रि का पावन अवसर चल रहा है और इसी के मद्देनज़र शहर में मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इस प्रशासनिक फैसले ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं, खासकर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया है कि आखिर क्यों एक बहु-धार्मिक शहर के सभी नागरिकों को सिर्फ इसलिए शाकाहारी बनने पर मजबूर किया जाए क्योंकि कुछ लोग अपने व्रत या धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। मोइत्रा का मानना है कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है और ऐसे प्रतिबंध धार्मिक विविधता वाले शहर के लिए उचित नहीं हैं।
महुआ का BJP पर सीधा वार-महुआ मोइत्रा ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि यह वही ‘पागलपन’ है जो भाजपा को वोट देने वाले लोगों को झेलना पड़ता है। मोइत्रा के अनुसार, हर व्यक्ति को अपने खान-पान की आदतें चुनने की पूरी आजादी होनी चाहिए। उनका तर्क है कि प्रशासन का यह कदम, जो लोगों की व्यक्तिगत पसंद पर अंकुश लगाता है, धार्मिक रूप से विविध शहर में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ महुआ की टिप्पणियों ने इस पर और गरमा-गरमी बढ़ा दी है।
धार्मिक भावनाओं का सम्मान या व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश?-भोपाल प्रशासन ने नवरात्रि के दौरान मांस, मछली और अंडे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। इसके तहत शहर की सभी नॉन-वेज दुकानें पूरे नौ दिनों तक बंद रहेंगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का आदर करने और त्योहार को शांतिपूर्ण एवं भक्तिमय माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह निर्णय धार्मिक आस्थाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का एक प्रयास है, ताकि भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और वे पूरी श्रद्धा के साथ अपने व्रत और पूजा-पाठ कर सकें।
इंदौर और मैहर भी आए जद में-भोपाल के अलावा, यह प्रतिबंध अब इंदौर और मैहर जैसे अन्य शहरों में भी लागू कर दिया गया है। इन शहरों में भी नवरात्रि के पवित्र दिनों में मांसाहार की दुकानों को बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी भक्त बिना किसी बाधा के अपने धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा कर सकें और पूरे क्षेत्र में एक पवित्र एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे। यह कदम धार्मिक संवेदनाओं के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, ताकि त्योहार का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना रहे।
बढ़ती बहस: आस्था बनाम अधिकार-यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है, जिसमें धार्मिक भावनाओं का सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की बात की जा रही है। जहाँ एक ओर प्रशासन का पक्ष है कि यह फैसला धार्मिक आस्थाओं के प्रति सम्मान दिखाने के लिए है, वहीं दूसरी ओर कई लोग और राजनीतिक दल इसे लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अनावश्यक हस्तक्षेप मान रहे हैं। महुआ मोइत्रा की तीखी प्रतिक्रिया ने इस बहस को और हवा दी है, जिससे यह मुद्दा अब केवल एक स्थानीय प्रशासनिक आदेश न रहकर एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।



