छत्तीसगढ़ के 9 राजनीतिक दलों पर चुनाव आयोग की सख्ती, डीलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू

चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई: कहीं आपका पसंदीदा दल भी न हो जाए ‘रडार’ पर!-क्या आप जानते हैं कि चुनाव आयोग ऐसे राजनीतिक दलों पर कड़ी नकेल कस रहा है, जो नियमों का पालन नहीं करते? जी हाँ, यह सच है! आयोग ने उन सभी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को चिन्हित किया है, जिन्होंने पिछले तीन सालों में अपने खातों का हिसाब-किताब ठीक से नहीं दिया या चुनाव लड़ने के बाद भी खर्च का ब्यौरा जमा नहीं किया। इसी कड़ी में, छत्तीसगढ़ के 9 दलों को सीधा ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाया गया है।
क्यों हो रही है दलों की ‘छुट्टी’?-देखिए, चुनाव आयोग के नियम बहुत साफ हैं। हर पंजीकृत राजनीतिक दल को अपनी कमाई और खर्च का पूरा हिसाब-किताब समय पर देना होता है। विधानसभा चुनाव के बाद 75 दिन और लोकसभा चुनाव के बाद 90 दिन का वक्त मिलता है। लेकिन कुछ दल हैं जो इन नियमों को ताक पर रख रहे हैं। ऐसा करके वे न सिर्फ पारदर्शिता से भाग रहे हैं, बल्कि हमारे पूरे चुनावी सिस्टम पर भी सवाल उठा रहे हैं। इसीलिए, आयोग ने अब ऐसे दलों को लिस्ट से बाहर करने का फैसला किया है। यह एक तरह से उन्हें आईना दिखाने जैसा है कि नियमों का पालन करना कितना ज़रूरी है। अगर दल अपनी जिम्मेदारियों से भागेंगे, तो उनका चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा। यह कदम लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
छत्तीसगढ़ के 9 दलों पर गिरी गाज!-चुनाव आयोग की इस तीसरी बड़ी कार्रवाई में छत्तीसगढ़ के 9 राजनीतिक दलों को निशाने पर लिया गया है। इन दलों के नाम हैं: भारत भूमि पार्टी, भारतीय जनता सेक्युलर पार्टी, भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, छत्तीसगढ़ विकास गंगा राष्ट्रीय पार्टी, छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, पिछड़ा समाज पार्टी यूनाइटेड और राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी। इन सभी को 9 अक्टूबर 2025 को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में आकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दल क्या सफाई देते हैं और आयोग का अगला कदम क्या होता है।
यह पहली बार नहीं है, पहले भी हो चुकी है कार्रवाई!-यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी अगस्त और सितंबर 2025 में, छत्तीसगढ़ के 16 राजनीतिक दलों को इसी तरह डीलिस्ट किया जा चुका है। उन्हें दो अलग-अलग आदेशों में गैर-मान्यता प्राप्त दलों की सूची से हटा दिया गया था। अब यह तीसरा चरण है, जिसमें 9 और दलों को नोटिस भेजा गया है। इससे साफ है कि चुनाव आयोग अपनी बात पर अडिग है और नियमों का पालन करवाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह दिखाता है कि आयोग किसी भी दल को विशेष छूट देने के मूड में नहीं है, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो।
आगे क्या होगा? क्या होगी प्रक्रिया?-अब इन 9 दलों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। सुनवाई में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। इसके बाद, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से भारत निर्वाचन आयोग को एक रिपोर्ट भेजी जाएगी। अंतिम फैसला वहीं से होगा। अगर ये दल अपनी बात ठीक से नहीं रख पाए या संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो उन्हें भी ‘डीलिस्टेड RUPPs’ की सूची में डाल दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दलों को यह सिखाने के लिए है कि उन्हें नियमों का पालन करना ही होगा और अपने कामकाज में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी। यह कदम देश की चुनावी व्यवस्था को और भी निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।



