महासमुंद में शराब दुकान का वीडियो वायरल, आबकारी विभाग के दावों की खुली पोल

शराब की दुकान से बोरे में शराब! वीडियो ने खोले कई राज़
क्या आपने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस वीडियो को देखा है जिसने छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं? महासमुंद जिले से आया यह वीडियो, शराब की दुकान से शराब की बोरियों को ले जाते हुए कुछ युवकों को दिखाता है। यह मामला सिर्फ एक वीडियो नहीं है, बल्कि उन दावों पर सवालिया निशान है जो विभाग अक्सर करता है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
शराब की दुकान से शराब की बोरियां: क्या चल रहा है?
वीडियो में, कुछ युवकों को सितली नाला स्थित देशी शराब दुकान से शराब की बोरियां ले जाते हुए देखा जा सकता है। एक युवक तो बोरे को स्कूटी पर रखता हुआ भी दिखाई देता है। यह दृश्य साफ तौर पर दिखाता है कि दुकान से शराब की अवैध सप्लाई हो रही है, जबकि विभाग इसे रोकने का दावा करता है। यह वीडियो इस बात का सबूत है कि दावों और हकीकत में कितना बड़ा अंतर है।
यह घटना लगभग 15 दिन पुरानी बताई जा रही है।
पूर्व सेल्समैन का कारनामा: कहानी का एक नया मोड़
इस वीडियो में एक युवक, जिसका नाम कुशाल राय बताया जा रहा है, शराब से भरे बोरे को ले जाते हुए दिखाई देता है। दिलचस्प बात यह है कि कुशाल पहले इसी दुकान में सेल्समैन का काम करता था, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद भी उसका नाम इस मामले में सामने आया है। यह कहानी में एक नया मोड़ लाता है और कई सवाल खड़े करता है। क्या यह मिलीभगत का मामला है? क्या विभाग के अंदर ही कुछ गड़बड़ है?
पत्रकारों से झड़प: सच्चाई को दबाने की कोशिश?
जब मीडिया की टीम इस वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए दुकान पर पहुंची, तो वहां मौजूद युवकों ने पत्रकारों के साथ गाली-गलौज की। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि दुकान के अंदर कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं, जिन्हें छुपाने की कोशिश की जा रही है। पत्रकारों के साथ हुआ यह व्यवहार, विभाग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है।
आबकारी विभाग का रवैया: कार्रवाई में देरी क्यों?
आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन कुशाल राय ने अपनी सफाई में कहा कि वह सिर्फ अपने दोस्त को छोड़ने आया था। हालांकि, वीडियो उसकी बातों को झूठा साबित करता है। विभाग ने जांच की बात कही है, लेकिन कार्रवाई में देरी हो रही है। इससे विभाग की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है? क्या दोषियों को बचाया जा रहा है?
यह मामला कई सवाल खड़े करता है और आबकारी विभाग को अपनी कार्यशैली पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।



